फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षक भर्ती पदवृद्धि आंदोलन फिर तेज: 25वें दिन भी नहीं बनी बात,नरेंद्र तीसरे दिन निर्जल अनशन पर, बिगड़ी तबीयत

Sun, 13 Sep 2026 02:19 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर भोपाल का आंदोलन फिर तेज हो गया है। अभ्यर्थी वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह के हस्तक्षेप के बाद 16वें दिन अनशन खत्म होने तक कई चरण आए। बातचीत के बावजूद ठोस निर्णय नहीं होने का आरोप लगाते हुए अब नरेंद्र राजपूत तीसरे दिन फिर निर्जल अनशन पर हैं।
विज्ञापन
निर्जल अनशन पर बैठ अभ्यर्थी की जांच करने पहुंची मेडिकल टीम - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्य प्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती-2025 में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। भोपाल के नीलम पार्क में चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन के 25वें दिन अभ्यर्थी फिर से सरकार पर दबाव बना रहे हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत तीसरे दिन से अन्न-जल त्यागकर निर्जल अनशन पर बैठे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक उनकी मूल मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। यह आंदोलन एक बार पहले भी लंबा खिंच चुका है। अगस्त में शुरू हुए आंदोलन के दौरान नरेंद्र राजपूत कई दिन तक निर्जल अनशन पर रहे। तब उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई थी। इसके बाद अभ्यर्थियों ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी थी।
विज्ञापन


आखिर मांग क्या है?
- वर्ग-2 माध्यमिक शिक्षक भर्ती में कम से कम 10 हजार पद बढ़ाए जाएं।
- वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती में कम से कम 25 हजार पद किए जाएं।
- वर्ग-2 के अलग-अलग विषयों में पर्याप्त संख्या में पद बढ़ाए जाएं।
- भर्ती के दूसरे चरण की चयन प्रक्रिया और परामर्श जल्द शुरू किया जाए।
- वर्ग-3 में विशेष शिक्षकों के बचे रिक्त पदों को सामान्य अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए।
- विभाग में मौजूद वास्तविक रिक्त पदों के आधार पर भर्ती का दायरा बढ़ाया जाए।

21 अगस्त से शुरू हुआ था मौजूदा आंदोलन
भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि को लेकर 21 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में अभ्यर्थियों ने धरना और भूख हड़ताल शुरू की। कुछ ही दिनों में आंदोलन आमरण और निर्जल अनशन तक पहुंच गया। नरेंद्र राजपूत ने अन्न और जल दोनों त्यागकर सरकार पर दबाव बनाने का फैसला किया। चार दिन के निर्जल अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई। उन्हें चक्कर और कमजोरी की शिकायत हुई। प्रशासन ने अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मांग पूरी होने तक अनशन खत्म करने से इनकार किया। इसके बाद करीब पांच दिन के निर्जल अनशन के बाद पुलिस उन्हें नीलम पार्क से उठाकर अस्पताल ले गई। इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई।

10वें दिन खून से लिखा मुख्यमंत्री के नाम पत्र
सरकार की ओर से मांग पर फैसला नहीं होने पर आंदोलनकारियों ने विरोध का तरीका और कड़ा कर दिया। आंदोलन के करीब 10वें दिन अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर पदवृद्धि की मांग की। अभ्यर्थियों ने कहा कि लंबे समय से आंदोलन और भूख हड़ताल के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। इसी दौरान भूख हड़ताल पर बैठी एक महिला अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ने और बेहोश होने की खबर भी सामने आई थी।
विज्ञापन


दिग्विजय सिंह पहुंचे, बातचीत के आश्वासन पर 16 दिन बाद खत्म हुआ एक चरण
आंदोलन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी नीलम पार्क पहुंचे। उन्होंने अभ्यर्थियों की मांगें सुनीं और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से फोन पर बात की। मंत्री की ओर से अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ 8 सितंबर को बैठक का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद शिक्षक दिवस पर 16 दिन से चल रहे अनशन का एक चरण समाप्त कराया गया। दिग्विजय सिंह ने कहा था कि बैठक में पदवृद्धि समेत अन्य मांगों पर चर्चा होगी और समाधान नहीं होने पर वह दोबारा अभ्यर्थियों के साथ आंदोलन में शामिल होंगे। यानी आंदोलन उस समय पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था, बल्कि सरकार से बातचीत की उम्मीद में अनशन का वह चरण समाप्त हुआ था।

बैठक और आश्वासन के बाद भी नहीं बनी बात
अब अभ्यर्थियों का कहना है कि पदवृद्धि की उनकी मूल मांग पर ठोस निर्णय नहीं हुआ है। इसी वजह से आंदोलन फिर तेज कर दिया गया है। नरेंद्र राजपूत दोबारा निर्जल अनशन पर बैठ गए हैं और उनके मुताबिक यह अनशन तीसरे दिन में पहुंच गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पद बढ़ाने का स्पष्ट आदेश चाहते हैं।

यह भी पढ़ें-भोपाल: गरबा पंडालों में पंचगव्य पीने के बाद प्रवेश, दुर्गा प्रतिमा और आरती की मांग, हिंदू संगठन ने दी चेतावनी



सरकार का क्या कहना है?
दूसरी ओर स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने को लेकर नियमों का हवाला दिया है। विभाग के मुताबिक परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद उसी भर्ती में विज्ञापित पदों की संख्या को बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता। खाली होने वाले नए पदों को अगली भर्ती में शामिल किया जा सकता है। विभाग ने नई भर्ती की तैयारी को लेकर करीब 18,088 रिक्त पदों का हिसाब बताया है। इनमें 10,050 नए और 8,038 बैकलॉग पद शामिल बताए गए हैं। इनमें उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक के पद शामिल हैं। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जुलाई 2027 तक की रिक्तियों की गणना के बाद नई भर्ती में वास्तविक पद संख्या तय होगी।
विज्ञापन


72 हजार खाली पदों और भर्ती के पदों में अंतर
आंदोलन के दौरान अभ्यर्थी बड़ी संख्या में खाली शिक्षक पदों का हवाला देते रहे हैं। विभाग के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग में कुल 72,901 पद खाली हैं, लेकिन इनमें सभी पद सीधी भर्ती से नहीं भरे जाने हैं। करीब 59,073 पद पदोन्नति से भरे जाने हैं, जबकि सीधी भर्ती से जुड़े रिक्त पदों की संख्या अलग है। इसलिए कुल रिक्त पद और नई सीधी भर्ती में आने वाले पदों को एक समान नहीं माना जा सकता।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें