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स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26: भोपाल की रैंकिंग बचाने की जंग, अब बैरसिया और आदमपुर बने सबसे बड़े इम्तिहान

Fri, 29 May 2026 12:08 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार भोपाल की रैंकिंग सिर्फ राजधानी की सफाई पर नहीं, बल्कि उसके मेंटी सिटी बैरसिया के प्रदर्शन पर भी निर्भर है। आदमपुर का कचरा पहाड़ और बैरसिया की कमजोर स्वच्छता व्यवस्था, दोनों राजधानी के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं।
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स्वच्छ सर्वेक्षण भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में देश के शीर्ष शहरों में जगह बनाए रखने की चुनौती के बीच भोपाल के सामने अब एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है। इस बार सिर्फ राजधानी की सफाई व्यवस्था ही नहीं, बल्कि बैरसिया का प्रदर्शन भी भोपाल की रैंकिंग तय करेगा। केंद्र सरकार की स्वच्छ सिटी जोड़ी योजना के तहत बैरसिया को भोपाल का मेंटी सिटी बनाया गया है, ऐसे में वहां की खराब स्वच्छता व्यवस्था राजधानी के अंकों पर असर डाल सकती है। केंद्रीय सर्वेक्षण टीम पिछले एक सप्ताह से भोपाल में सफाई, कचरा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं का आकलन कर रही है। इसी दौरान यह भी सामने आया है कि बैरसिया अब भी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और कचरे के पृथक्करण जैसे प्रमुख मानकों पर काफी पीछे है। वहीं भोपाल के लिए आदमपुर लैंडफिल में जमा करीब 7 लाख मीट्रिक टन कचरा अब भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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बैरसिया की कमजोरी से कट सकते हैं भोपाल के अंक
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक बैरसिया के बेहतर प्रदर्शन पर भोपाल को अतिरिक्त अंक नहीं मिलेंगे, लेकिन यदि वहां की स्थिति कमजोर पाई गई तो राजधानी के कुल स्कोर में कटौती हो सकती है। यही वजह है कि पिछले एक साल से भोपाल नगर निगम लगातार बैरसिया में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए निरीक्षण, प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चला रहा है।

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आदमपुर लैंडफिल पर भी सर्वे टीम की नजर
भीषण गर्मी के कारण सर्वेक्षण की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन टीम 31 मई तक अपना निरीक्षण पूरा कर सकती है। टीम ने विभिन्न वार्डों में नागरिकों से फीडबैक लिया और देर रात आदमपुर लैंडफिल पहुंचकर कचरा निपटान व्यवस्था का जायजा भी लिया।
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भोपाल और बैरसिया के बीच बड़ा अंतर
स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल फिलहाल देश में दूसरे स्थान पर है। शहर को 7-स्टार गार्बेज फ्री सिटी और वाटर प्लस का दर्जा भी मिला हुआ है। राजधानी में 100 फीसदी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और करीब 95 फीसदी स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण किया जा रहा है। इसके उलट बैरसिया की स्थिति काफी कमजोर है। 15 से 50 हजार आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बैरसिया की रैंक 532वीं रही थी। यहां डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सिर्फ 69 फीसदी और स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण मात्र 17 फीसदी है। शहर को अब तक कोई स्टार रेटिंग भी नहीं मिली है।

 
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