भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मध्य प्रदेश में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतर्गत गणना चरण के प्रमुख निष्कर्ष सामने आ गए हैं। यह चरण 4 नवंबर 2025 से 18 दिसंबर 2025 तक चला, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और समावेशी बनाना है। प्रदेश में 42 लाख 74 हजार 160 मतदाता नहीं मिले हैं।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि कुछ निर्वाचक ऐसे रहे, जिनसे गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हो सके। इसके पीछे कारण रहे। निर्वाचक का अन्य राज्य में पंजीकरण, व्यक्ति का अस्तित्व में न होना, समय सीमा तक प्रपत्र जमा न करना अथवा स्वयं मतदाता का पंजीकरण में रुचि न लेना। इसके अलावा एक से अधिक स्थानों पर नामांकित पाए गए निर्वाचकों का नाम केवल एक स्थान पर ही रखा जाएगा।
कोई भी पात्र मतदाता वंचित न रहे
31 लाख 51 हजार अनुपस्थित
31 लाख 51 हजार यानि करीब 5.49% ऐसे मतदाताओं का पता चला है, जो वर्तमान पतों पर नहीं हैं। ये मतदाता कहीं और चले गए हैं। अनुपस्थित मतदाता सबसे ज्यादा इंदौर के हैं। ये करीब एक लाख 75 हजार हैं। वहीं दूसरे नंबर पर भोपाल है, यहां पर एक लाख 1 हजार 503 व तीसरे नंबर पर जबलपुर है। यहां पर 66 हजार मतदाता अनुपस्थित मिले हैं।
वहीं, मृत मतदाताओं की संख्या 8 लाख 46 हजार है। ये कुल मतदाताओं का 1.47 फीसदी होता है। वहीं, ऐसे मतदाता जिनके नाम दो या उससे ज्यादा जगहों पर दर्ज मिले हैं वे 2 लाख 77 हजार हैं। डुप्लीकेट मतदाताओं की संख्या में सबसे ज्यादा 23,594 बुरहानपुर में मिली है। वहीं दूसरे नंबर पर इंदौर है जहां 22,808 मतदाता और तीसरे नंबर पर धार है जहां पर 14,195 डुप्लीकेट मतदाता मिले हैं।
इसके अलावा एसआईआर में युवा मतदाताओं के समावेशन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। वे नागरिक जो 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण करेंगे, उन्हें प्रपत्र-6 के माध्यम से आवेदन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
22 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्ति की अवधि निर्धारित
निर्वाचन आयोग ने बताया कि 23 दिसंबर 2025 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है, जो मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। प्रारूप सूची में शामिल न किए गए नामों की बूथ-वार सूचियां पंचायत भवनों और नगरीय निकाय कार्यालयों में प्रदर्शित की जा रही हैं। 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्ति की अवधि निर्धारित की गई है। इस दौरान कोई भी मतदाता या राजनीतिक दल पात्र नाम जोड़ने अथवा अपात्र नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना विधिक प्रक्रिया और कारणयुक्त आदेश के किसी भी नाम का विलोपन नहीं किया जाएगा।