नए साल 2024 में पूर्वी एवं मध्य भारत के लिए ग्रहण की खगोलीय घटना पर ग्रहण लगेगा। इसका मतलब हुआ कि इस कैलेंडर वर्ष में भारत के इस भूभाग पर न तो सूर्यग्रहण और न ही चंद्रग्रहण दिखेगा। नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि वैसे तो विश्व में दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना होगी। लेकिन इनमें से तीन ग्रहण संपूर्ण भारत में नहीं दिखेंगे। केवल 18 सितंबर को सुबह पश्चिमी भारत के कुछ नगरों में कुछ मिनट के लिए उपछाया चंद्रग्रहण होगा। उपछाया ग्रहण को देख कर महसूस नहीं किया जा सकता है तथा इसकी धार्मिक मान्यता भी नहीं बताई गई है। इस तरह से 2024 भारत के लिए ग्रहण विहीन होगा साल।
चंद्रग्रहण- 25 मार्च
सूर्यग्रहण- आठ अप्रैल
चंद्रग्रहण- 17-18 सितंबर
सूर्यग्रहण- दो अक्तूबर
सारिका ने बताया सूरज और पृथ्वी की बदलती दूरी का विज्ञान
बुधवार, तीन जनवरी की सुबह जब कोहरे और ठिठुरन भरी थी, तब आप सोच रहे होंगे कि सूर्य काश पास होता और कुछ गरमाहट देता। लेकिन वास्तविकता यह है कि सूर्य सचमुच में पृथ्वी के सबसे पास था। सारिका घारू ने सूरज और पृथ्वी की बदलती दूरी का विज्ञान बताते हुए जानकारी दी कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा अंडाकार पथ में करती है। इस कारण यह साल में एक दिन सूर्य के सबसे पास आती है और एक दिन सबसे दूर।
सारिका ने बताया कि तीन जनवरी को सुबह छह बजकर आठ मिनट पर पृथ्वी सूर्य के सबसे पास के बिंदु पर थी। यह दूरी घटकर 14 करोड़ 71 लाख 632 किमी रह गई थी। इसे पेरिहेलियन बिंदु पर आना कहते हैं। पास आने पर भी उत्तरी गोलार्द्ध के स्थानों पर सूर्य की तुलना में झुकाव होने के कारण सूर्य की किरणें इस समय तिरछी पड़ रही हैं, इसलिए ठंडक का अहसास हो रहा है। सूर्य पांच जुलाई को पृथ्वी से सबसे दूर के बिंदु पर होगा, जिसे अपहेलियन बिंदु पर आना कहते हैं। उस समय सूर्य की दूरी 15 करोड़ 20 लाख किमी से भी अधिक हो जाएगी। सारिका ने बताया कि पेरिहेलियन कब होगा, यह बदलता रहता है। हर 58 साल में इसमें एक दिन का अंतर आ जाता है।