हमारा हिंदुस्तान... दर्जनों धर्मों की बसाहट वाली दुनिया इकलौती धरती... सैकड़ों सांस्कृतिक रंग और परंपराओं से सजा एक देश। जहां रमजान में राम समाहित और दीपावली में अली की मौजूदगी, महज लफ्जों तक नहीं, बल्कि भाईचारे, सौहाद्र, आपसे मेलमिलाप और एक दूसरे की खुशियां बांटने के जमीनी वास्तविकता से जुड़ा हुआ है। माह ए रमजान में के दौरान भी ऐसे आपसे भाईचारे के किस्से पसरे पड़े हैं। मामला जफर आलम खान के लिए अरेंज हो रही इफ्तार पार्टी का हो या पं. पंकज शर्मा द्वारा मुस्लिम भाइयों को सेहरी के लिए जगाने का, मकसद संस्कृति, परम्परा और रिवाजों को जिंदा रखने है, ताकि अपना हिंदुस्तान इसके मूल स्वरूप के साथ बरकरार रहे।
जफर आलम खान, ठेठ भोपाली हैं, अपने मजहब के लिए समर्पित। दोस्ती कर लेने के जितने माहिर हैं, उतने ही पक्के उन रिश्तों को निभाने में भी हैं। अपने रियल एस्टेट कारोबार के लिए कभी दिल्ली में कदम होता है तो कभी बंगलुरू में और कभी मुंबई में। इसी कारोबारी भागदौड़ में कोलकाता के रवि चौहान, पंजाब के बलविंदर सिंह सोढ़ी, लखनऊ के विनय द्विवेदी और चित्रकूट के मुन्ना यादव एवं बंगलुरू के सुनील शेट्टी उनके अजीजों में शामिल हैं। परिवार से ज्यादा इन लोगों के साथ वक्त गुजर रहा है। यही वजह है कि जब माह ए रमजान शुरू हुआ तो रवि ने प्रस्ताव रखा कि जफर आलम के लिए इफ्तार पार्टी की व्यवस्था करेंगे। बाकी लोगों को जब इस बारे में पता चला तो सबके बीच इस बात की होड़ लग गई कि सिर्फ रवि ही क्यों, बाकी लोग भी रिश्ते निभाई के इस मौके को अपने हिस्से लाएंगे। बात मनमनुहार से शुरू हुई और एक अनंत बहस तक पहुंचने लगी। अंततः फैसला किया गया कि कोई भी अकेले इस शुभ अवसर का इकलौता हकदार नहीं बनेगा, बल्कि सबको बारी बारी से इसका अवसर मिलेगा। इफ्तार पार्टी के लिए क्रम तय करने के लिए अब लॉटरी से नाम निकाले जाने की तैयारी की जा रही है। जफर आलम इस पूरे मामले को लेकर भावविभोर हैं और अपने देश की संस्कृति पर निहाल भी हैं। वे कहते हैं कि यही मेरे भारत की खूबसूरती है...! कुछ नफरती इस भाइचारे को झूठा इतिहास गढ़कर ख़तम करना चाहते हैं.. लेकिन उनके मनसूबे कभी पूरे नहीं होंगे, जब तक हमारे समाज में रवि, बलविंदर, विनय, मुन्ना, सुनील जैसे लोग मौजूद हैं।
पं. पंकज की सेहरी जगाई कृतज्ञ रोजादार
दिनभर की व्यस्त दिन दिनचर्या के बाद भी कोई दिन ऐसा नहीं होता, जब अल सुबह पंडित पंकज शर्मा का जयश्री महाकाल के उद्घोष के साथ शुभप्रभात का संदेश न घनघनाए। सोमवार से शनिवार तक हर दिन के शुभ होने की कामना के साथ पंकज एक सुविचार भी परोसते हैं। बरसों का ये सिलसिला किसी भी मौसम नहीं थमता। पिछले कई वर्षों से जारी इस क्रम में रमजान माह में एक हिस्सा और जुड़ जाता है। पंडित पंकज शर्मा इस पूरे महीने सूरज किरणें निकलने से पहले अपने मुस्लिम मित्रों को सेहरी के लिए जगाने की मशक्कत भी करते हैं। रोजदारों को भेजे जाने वाले ये संदेश अल सुबह सेहरी के वक्त से पहले भेजे जाते हैं, ताकि किसी वजह से अगर रोजादार नहीं उठ पाए हों तो पंकज के इस मेसेज से जाग जाएं और वक्त पर सेहरी से फारिग हो जाएं और समय पर फजिर की नमाज अदा कर सकें।
प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर में करीब दो दशक से अधिक समय से सक्रिय पंकज शर्मा सर्वधर्म समभाव के पक्षधर हैं। सप्ताह में कम से कम एक बार बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उनकी उज्जैन हाजिरी लगती है। जबकि गुरुवार का दिन खजराना की नाहर शाह वली दरगाह पर माथा टेकना उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा है। बंबई बाजार, मुकेरीपुरा, रानीपुरा से लेकर आजाद नगर जैसे ठेठ मुस्लिम बहुल इलाकों में पंडित पंकज शर्मा अक्सर पाए जाते हैं। माथे पर चंदन का तिलक, हाथ में रुद्राक्ष का कलाईबंध और सीने से लगी जनेऊ के साथ जब वे कप प्याली से नमक वाली चाय की चुस्की लेते दिखाई देते हैं तो अक्सर अनजान लोग खुसुर पुसुर करते दिखाई देते हैं।
करबला कमेटी के मंच पर सम्मानित
मुहर्रम माह में करबला मैदान पर लगने वाले तीन दिवसीय मेले में समाज में अनुकरणीय उदाहरण देने वाले लोगों को सम्मानित किए जाने की पुरानी परंपरा है। करबला कमेटी अपने इस मंच पर पंडित पंकज शर्मा को भी कई बार स्थान दे चुकी है।
सेहरी मैसेज के लिए खास तैयारी
शराब सेवन और मांसाहार से कोसों की दूरियां रखने वाले पंडित पंकज शर्मा कहते हैं कि रोजाना भोर काल में महाकाल बाबा के संदेश लोगों तक पहुंचाने की बरसों पुरानी आदत बनी हुई है। इसी में रमजान माह के दौरान लोगों को सेहरी के लिए जगाने का सिलसिला जोड़ा। कुछ मुस्लिम दोस्तों से सलाह और कई मुस्लिम उलेमाओं से तस्दीक के साथ मेसेज तैयार करना शुरू हुआ। मकसद यही है कि लोगों तक ये स्वच्छ संदेश पहुंचे कि हम उस देश में रहने वाले सौभाग्यशाली हैं, जिनके हिस्से सभी धर्मों का आदर, सम्मान और एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होना नसीब आया है। दुनियाभर में किसी मुल्क में न ऐसी संस्कृति है, न ऐसा भाईचारा और न दूसरे मजहब के त्यौहार में शरीक होकर खुशियां बांटने का सुखद अहसास।
वक्त : सेहरी और इफ्तार
इफ्तार (4 मार्च) शाम 6.30 बजे
सेहरी (5 मार्च) सुबह 5.00 बजे