फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ramzan: त्यौहार की रौनक में एक चिराग मेरा भी... इस रमजान सजे हैं गली, मुहल्ले, चौक, चौराहे, बाजार

Thu, 28 Mar 2024 08:54 AM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल

सार

झिलमिल बाजार देर रात तक लोगों को वक्त की देरी का अहसास नहीं होने देते हैं और अल सुबह तक खरीद फरोख्त का सिलसिला जारी रहता है। परंपरा अनुसार इस रमजान भी बाजार रौशनी से लबरेज और ग्राहकों से गुलजार दिखाई दे रहे हैं।
विज्ञापन
भोपाल में रमजान के मौके पर गली-मुहल्ले भी रौशनी से जगमगा रहे हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के बड़े त्यौहारों दीवाली, दशहरा, न्यू ईयर या वैशाखी की गिनती में रमजान माह और ईद भी शामिल है। उत्सवधर्मी अपने देश में हर त्यौहार को जश्न की तरह मनाने की परंपरा बरकरार है। हर साल रमजान माह में भोपाल शहर के प्रमुख बाजारों में विद्युत सज्जा और आकर्षक डेकोरेशन किया ही जाता है। इस रमजान एक कदम आगे चलकर लोगों ने मुहल्लों और घरों तक में बिजली बल्ब की लड़ियों से अपनी खुशियां जाहिर की हैं। पुराने शहर के सैकड़ों मुहल्ले और हजारों छोटी बड़ी गलियां रंगबिरंगी झिलमिलाहट से रौशन नजर आ रही हैं।
विज्ञापन


रमजान और ईद की खरीद का मुख्य केंद्र चौक बाजार, इब्राहिमपुरा, नदीम रोड, लखेरापुरा, जुमेराती, इतवारा, जहांगीराबाद, काजी कैंप, लक्ष्मी टॉकीज आदि इलाका होता है। इन बाजारों की स्थानीय कमेटियां विभिन्न त्यौहारों पर सजावट की व्यवस्था करती हैं। खुशियों को और ज्यादा जोश भरती ये रंग बिरंगी लाइट्स ग्राहकों को भी चकाचौंध करने में कामयाब होती हैं। झिलमिल बाजार देर रात तक लोगों को वक्त की देरी का अहसास नहीं होने देते हैं और अल सुबह तक खरीद फरोख्त का सिलसिला जारी रहता है। परंपरा अनुसार इस रमजान भी बाजार रौशनी से लबरेज और ग्राहकों से गुलजार दिखाई दे रहे हैं।

गलियों तक झिलमिलाहट
आमतौर पर त्यौहार की खुशियां जाहिर करते लोग व्यक्तिगत तौर पर अपने घरों पर सजावट करते रहे हैं, लेकिन इस रमजान सिलसिला ऐसा चला कि मुहल्ले, गलियां, चौक, चौराहे तक सजावट से आबाद होते गए। आरिफ नगर से लेकर जहांगीराबाद तक, अहाता रुस्तम खां से कोहेफिजा और ईदगाह हिल्स तक और बाग दिलकुशाबाद से लेकर फरहत अफ्जा और ऐश बाग तक तरफ बिजली के बल्बों की झालर दिखाई दे रही हैं।
विज्ञापन


कंट्रीब्यूशन से हुई सजावट
पुराने शहर के विभिन्न मोहल्लों में स्थानीय उत्साही युवाओं ने इस सजावट मुहिम का जिम्मा उठाया। घरों घर दस्तक देकर एक निश्चित राशि का सहयोग लिया गया। जरूरी रकम जमा न होने पर युवाओं ने अपने कंट्रीब्यूशन को बढ़ाया भी और ज्यादा अदा कर पाने वालों से कुछ अतिरिक्त राशि लेकर सजावट काम को पूरा किया। लोगों की छतों पर चढ़कर, ऊंची दीवारों तक पहुंच कर और इन बिजली बल्ब लड़ों को सुंदर आकार देने की मशक्कत भी युवाओं ने की।

खर्च हजारों का
टोल वाली मस्जिद बुधवारा क्षेत्र के रहवासी फरहान खान कहते हैं कि पहले बल्ब की लड़ियां किराए पर लेने की योजना बनी, लेकिन इलेक्ट्रिक सजावट प्रोवाइडर के पास इनकी उपलब्धता न होने ने कदम रोके। जहां से इनकी मौजूदगी हो पा रही थी, उनका महीने भर का किराया बजट से मैच करता नजर नहीं आया। तय हुआ कि इनकी स्थाई खरीदी कर ली जाए तो ये हर मौसम और मौके पर काम आने वाली चीज हो सकती है। फरहान बताते हैं कि उनकी गली को करीब 45 हजार रुपए की बिजली बल्ब लड़ियों से रौशनी मिल पाई है। वे कहते हैं कि मुहल्ले की जरूरत के लिहाज से हर मुहल्ले में खर्च का आंकड़ा कम या ज्यादा है।
विज्ञापन


(भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें