मध्य प्रदेश में बारिश का सिस्टम कमजोर होने से भारी बारिश से राहत मिली हुई है। शुक्रवार को प्रदेश के इंदौर उज्जैन समेत 10 जिलों में बारिश दर्ज की गई वहीं राजधानी भोपाल समेत अधिकतर जिलों में दिनभर धूप खिली रही। मंडला में करीब डेढ़ इंच पानी गिर गया। सिवनी और सागर में 1 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। सतना में पौन इंच और धार में आधा इंच पानी गिरा खरगोन, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम और बालाघाट के मलाजखंड में भी हल्की बारिश हुई। प्रदेश में अगले 4 दिन यानी 10 सितंबर तक तेज बारिश का दौर थमा रहेगा। इसकी वजह किसी स्ट्रॉग्न सिस्टम का एक्टिव नहीं होना है।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के श्योपुर, दतिया, मुरैना, भिंड, राजगढ़, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, उज्जैन महाकालेश्वर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल, उमरिया, में बिजली के साथ मध्यम गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। कटनी, बुरहानपुर, निवाड़ी के साथ-साथ भोपाल, सागर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, हरदा, इंदौर, देवास, सीहोर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, अशोकनगर, विदिशा।उदयगिरी में बिजली के साथ हल्की आंधी और बारिश की संभावना है। रायसेन, टीकमगढ़, छतरपुर खजुराहो, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, अनूपपुर अमरकंटक, सिंगरौली, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, दमोह, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, खरगोन महेश्वर, पांडुर्ना में बारिश हो सकती है।
10 सितंबर तक तेज बारिश की संभावना नहीं
मौसम विभाग के सीनियर वैज्ञानिक वेद प्रकाश ने बताया कि लोकल सिस्टम की वजह से पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो रही है। उन्होंने बताया कि अभी प्रदेश से एक मानसून ट्रफ लाइन गुजर रही है। इस कारण 10 सितंबर तक तेज बारिश की संभावना नहीं है। वहीं अगले 24 घंटे में यह दौर थमेगा।
भोपाल में बारिश टॉप-10 जिलों शामिल
गौरतलब है कि राजधानी भोपाल में बारिश का आंकड़ा 43 इंच के पार है। सबसे ज्यादा बारिश मंडला जिले में हुई है। यहां अब तक 47.56 इंच पानी गिर चुका है। टॉप-10 जिलों में मंडला के साथ सिवनी, भोपाल, छिंदवाड़ा, सीधी, श्योपुर, नर्मदापुरम, डिंडौरी, रायसेन और सागर शामिल हैं। भोपाल में 43 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। सितंबर के शुरुआती 3 दिन भी तेज बारिश हुई है। यही वजह है कि प्रदेश में अब तक औसत 35.6 इंच बारिश हो चुकी है, जो सीजन की 95 प्रतिशत से अधिक है।दरअसल एमपी में 21 जून को मानसून एक्टिव हुआ था। जून, जुलाई और अगस्त में यह जमकर बरसा।
प्रदेश के कई बांधों में जलस्तर बढ़ा
इस मानसून सीजन में जुलाई के आखिरी सप्ताह में ही मध्यप्रदेश के कोलार समेत कुछ डैम छलक उठे थे। अगस्त में अधिकांश डैम ओवरफ्लो हो गए और इनके गेट खोलने पड़े। सितंबर में भी यही स्थिति है। भदभदा, कलियासोत और कोलार से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को नर्मदापुरम के तवा डैम समेत बाणसागर, कुंडालिया, बरगी, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, जोहिला, पारसडोह, चंदौरा, कुंडालिया बांधों में भी पानी बढ़ गया।