फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भोपाल के मास्टर प्लान का रास्ता साफ: सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट जारी करने की दी मंजूरी, जारी रहेगी सीलिंग

Tue, 22 Sep 2026 06:41 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल का 21 साल से लंबित मास्टर प्लान अब आगे बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ड्राफ्ट जारी करने की मंजूरी दे दी है। वहीं, रहवासी क्षेत्रों में सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के बाद कहा कि कोर्ट ने कार्रवाई में पारदर्शिता के निर्देश दिए हैं और अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई की बात कही है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ऑनलाइन सुनते रहवासी और याचिका कर्ता - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी भोपाल के 21 साल से लंबित मास्टर प्लान को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग की कार्रवाई से जुड़े मामले में राज्य सरकार को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति दी गई है। हालांकि अंतिम प्रकाशन से पहले इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी।दूसरी ओर, आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विपरीत चल रहे प्रतिष्ठानों पर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान कार्रवाई में लापरवाही को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई और निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। तब सरकार और नगर निगम को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
विज्ञापन


दिन में बंद, रात में खुल रही दुकानों की शिकायत
सुनवाई से पहले रहवासी पक्ष की ओर से करीब 10 शिकायतें कोर्ट के सामने रखी गई थीं। इनमें आरोप लगाया गया कि अगस्त में नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को सील किया था, उनमें से कुछ दिन में बंद रहते हैं, लेकिन शाम या रात में दोबारा खुल जाते हैं। रहवासियों ने सीलिंग की कार्रवाई में पारदर्शिता की मांग की। कोर्ट के सामने यह मुद्दा उठाए जाने के बाद कार्रवाई को लेकर सख्ती के निर्देश दिए गए।

विवेक त्रिपाठी बोले- सीलिंग की कार्रवाई पारदर्शी हो
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने सुनवाई के बाद कहा कि रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई में गड़बड़ी की शिकायत रखी थी। उनके मुताबिक, दिन में प्रतिष्ठान बंद रखे जाते हैं और रात में दोबारा खोल दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए सीलिंग की कार्रवाई में पूरी पारदर्शिता रखने के निर्देश दिए हैं। त्रिपाठी के अनुसार, कोर्ट ने भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने और छोटे व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम को कार्रवाई जारी रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन


मास्टर प्लान पर सरकार को मिली मंजूरी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति मांगी गई। कोर्ट ने ड्राफ्ट जारी करने की मंजूरी दी, लेकिन पूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अंतिम मास्टर प्लान से जुड़ी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखने की बात कही। वर्तमान में भोपाल में वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर विकास कार्य किए जा रहे हैं। नया मास्टर प्लान करीब 21 साल से लंबित है। विवेक त्रिपाठी ने बताया कि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवासीय जमीन पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई जरूरी है। जरूरत पड़ने पर नगर निगम को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने की बात भी कही गई है।

62 हजार 500 प्रतिष्ठानों की सूची, 8 हजार से ज्यादा को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चिह्नित किया था। निगम की सूची में करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 8,084 को नोटिस दिए गए थे। इसके बाद करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कार्रवाई की गई। हालांकि व्यापारी संगठनों के विरोध के बाद सीलिंग की कार्रवाई रुक गई थी। पिछले करीब 22 दिन से कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद निगम को कार्रवाई जारी रखने को कहा गया है।

यह भी पढ़ें-भोपाल में 2 हजार डंपरों का चक्का जाम: 4 लाख के जुर्माने पर थाने तक पहुंचा विरोध, कल सड़क रोकने की चेतावनी


सरकार की बनाई समिति भी भंग
मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई समिति को लेकर भी सुनवाई में चर्चा हुई। विवेक त्रिपाठी के मुताबिक, कोर्ट ने समिति को लेकर नाराजगी जताई और पहले बनाई गई समिति को भंग कर दिया गया है। अब नगर निगम को अपने स्तर पर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश हैं।

रहवासी बोले- अवैध कारोबार से बढ़ रही परेशानी
रहवासी पक्ष का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां होने से शोर, भीड़ और यातायात जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उनका आरोप है कि इससे सार्वजनिक शांति और सुरक्षा प्रभावित होती है। स्कूलों के आसपास बढ़ते यातायात को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।

अफसरों ने ऑनलाइन सुनी सुनवाई
भोपाल से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई पर नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी भी नजर बनाए रहे। अधिकारियों ने सुनवाई ऑनलाइन सुनी और कोर्ट के निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जानकारी ली।
विज्ञापन

अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इसमें सरकार और नगर निगम को सीलिंग की कार्रवाई और मास्टर प्लान से जुड़ी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखनी होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें