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Bmhrc news: खून की नस तक फैल चुका था पैन्क्रियाज़ कैंसर, bmhrc के चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर बचाई महिला की जान

Tue, 06 Aug 2024 08:09 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

राजधानी भोपाल के 31 वर्षीय महिला के खून की नस तक पैन्क्रियाज़ कैंसर फैल चुका  था। बीएमएचआरसी के चिकत्सकों ने जटिल सर्जरी कर 30 वर्षीय महिला की जान बचाई। 
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बीएमएचआरसी में ऑपरेशन करते डॉक्टर्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 पैंन्क्रियाज़ कैंसर से जूझ रही एक 30 वर्षीय महिला की बीएमएचआरसी में जटिल सर्जरी हुई है। अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभाग के डॉक्टर ने अन्य चिकित्सकों व अपनी टीम के साथ मिलकर इस सर्जरी को अंजाम दिया। इस केस में कैंसर पैंन्क्रियाज़ के पास खून की नस से चिपक गया था और सर्जरी के दौरान छोटी सी गलती भी मरीज के लिए घातक हो सकती थी। आमतौर पर इस तरह के आॅपरेशन में करीब 10 से 12 घंटे लगते हैं, लेकिन यह पूरा ऑपरेशन सिर्फ 3-4 घंटे में पूरा हो गया। मरीज की हालत में अब काफी सुधार है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। मरीज का आयुष्मान भारत योजना से निशुल्क इलाज़ किया गया। 

4 महीने से पैन्क्रियाज़ कैंसर से जूझ रही थी महिला
बीएमएचआरसी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सोनवीर गौतम ने बताया कि महिला बीते 4 महीने से पैन्क्रियाज़ कैंसर से जूझ रही थी। वह एक अन्य अस्पताल में उनका ऑपरेशन के लिए भर्ती हुई थीं, लेकिन डॉक्टर ने यह कहते हुए आपरेशन करने से मना कर दिया कि कैंसर पैन्क्रियाज़ से निकलकर पास स्थित खून की नस पोर्टल वेन तक पहुंच गया है। पोर्टल वेन एक बहुत महत्वपूर्ण नस होती है, जो गैस्टोइन्टेस्टाइनल टैक्ट, गॉल ब्लैडर, पैन्क्रियाज़ और स्पलीन से रक्त को लिवर तक पहुंचाती है। आपरेशन करने पर नस फट सकती थी, जो मरीज के लिए घातक साबित होती। इसके बाद मरीज बीएमएचआरसी में पहुंची। मरीज की परेशानी को देखते हुए हमने यह रिस्की सर्जरी करने का फैसला किया। इन्टरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ राधेश्याम मीणा से केस के बारे में चर्चा की और यह बात सामने आई कि खून की नस से कैंसर को हटाया जा सकता है। इसके बाद मरीज का ऑपरेशन किया, जो पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने बताया कि इस तरह का ऑपरेशन करीब 10 से 12 घंटे में पूरा होता है, लेकिन हमने सिर्फ 4 घंटे में ही इसे पूरा कर लिया। इससे मरीज की जल्द रिकवरी में मदद मिली। आमतौर पर इस तरह के ऑपरेशन में खून बहने की वजह से मरीज को ब्लड टांसफ्यूज करना पड़ता है,लेकिन इस केस में बाहर से ब्लड देने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। मरीज की हालत में अब काफी सुधार है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
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मरीज अत्यंत गंभीर स्थिति में आई थी महिला 
बीएमएचआरसी, भोपाल को प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि महिला अस्पताल में काफी गंभीर स्थिति में आई थी उसको कैंसर काफी फैल चुका था और सर्जरी काफी रिस्की थी। मरीज अब स्वस्थ होकर अपने घर लौटी हैं, यह हमारे लिए काफी संतुष्टि की बात है। उन्होंने बताया कि पैन्क्रियाज़ कैंसर एक प्रकार का कैंसर है, जो पैन्क्रियाज़ से शुरू होता है। पैन्क्रियाज़ हमारे पेट के निचले हिस्से में मौजूद होता है। यह एन्जाम्स बनाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करते हैं और हार्मोन पैदा करता है, जो ब्लड शुगर के नियंत्रण में सहायक होते हैं। 
 
पैन्क्रियाज़ कैंसर के कारण 
पैन्क्रियाज़ कैंसर किस वजह से होता है, इस बारे में दावे में कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि निम्नलिखित वजहों से इसके होने की आशंका बढ़ जाती है।
1. स्मोकिंग करना 
2. पैंन्क्रियाइटिस
3. परिवार में पहले किसी को यही बीमारी होना
4. मोटापा
5. अत्यधिक शराब का सेवन करना 

पैन्क्रियाज़ कैंसर के लक्षण 
-  पेट में दर्द, भूख न लगना, वजन कम होना, पीलिया होना, गहरे रंग की यूरिन होना, खुजली होना, डायबिटीज़ नियंत्रित न होना
 
फैक्ट फाइल
-भारत में प्रति वर्ष पैन्क्रियाज़ कैंसर के 10860 मामले सामने आते हैं।
-प्रति 1 लाख लोगों में से हर 2 पुरुष और 1 महिला इस कैंसर से पीड़ित हैं।
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