फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एनजीटी सख्त: भोपाल की लोअर लेक में रोज 8 एमएलडी गंदा पानी, 2.10 करोड़ रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन

Tue, 29 Sep 2026 05:50 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल की लोअर लेक में दो नालों से रोज करीब 8 एमएलडी अनुपचारित सीवेज पहुंचने की रिपोर्ट पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 21 महीने की अवधि के लिए 2.10 करोड़ रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन किया है। हालांकि, यह राशि अभी अधिकरण की ओर से अंतिम रूप से तय नहीं की गई है।
विज्ञापन
एनजीटी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भोपाल शहर की लोअर लेक में सीवेज के सीधे प्रवाह और वेटलैंड की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सख्ती दिखाई है। सुनवाई में सामने आया कि पहले चिन्हित 37 नालों को एसटीपी की ओर मोड़ने के बावजूद दो नालों से करीब 8 एमएलडी अनुपचारित सीवेज रोज लोअर लेक में पहुंच रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बाणगंगा नाले से करीब छह एमएलडी और पुराने मछली घर के पास बाणगंगा नाला क्षेत्र से करीब दो एमएलडी सीवेज झील में जा रहा है।
विज्ञापन

मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सेंट्रल जोन पीठ, भोपाल में राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर, भोपाल एवं अन्य के रूप में चल रहा है। सुनवाई न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ के समक्ष हुई। आवेदक राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पैरवी की।

37 नाले रोके, फिर भी दो से जा रहा सीवेज
पिछली सुनवाई में अधिकरण ने पाया था कि क्षेत्र में निकलने वाले अपशिष्ट जल के उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण अनुपचारित पानी सीधे जलस्रोत में पहुंच रहा है। इसके बाद मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नगर निगम के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना करने के निर्देश दिए गए थे। सुनवाई में पेश रिपोर्ट के अनुसार लोअर लेक में पहले चिन्हित 37 नालों को इंटरसेप्ट कर एसटीपी की ओर मोड़ दिया गया है। इसके बावजूद दो नालों से अनुपचारित सीवेज का प्रवाह जारी है। इससे रोज करीब 80 लाख लीटर गंदा पानी झील में पहुंचने का दावा रिपोर्ट में किया गया है।
विज्ञापन


21 महीने में 2.10 करोड़ रुपये का हिसाब
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई रिपोर्ट में अधिकरण के पूर्व आदेशों के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन किया गया है। इसमें 31 मार्च 2026 से 31 दिसंबर 2027 तक 21 महीने की अवधि और दो नालों को आधार बनाया गया है। प्रति नाला प्रति माह पांच लाख रुपये की दर से गणना की गई। इस तरह दो नालों के लिए 21 महीने में राशि 2.10 करोड़ रुपये होती है। हालांकि, यह अधिकरण की ओर से तय अंतिम क्षतिपूर्ति नहीं है। राशि का अंतिम निर्धारण उल्लंघन की वास्तविक अवधि, उपचार व्यवस्था और संबंधित तथ्यों के सत्यापन के बाद होना है।

10 एमएलडी का एसटीपी दिसंबर 2027 तक होगा तैयार
नगर निगम की ओर से बताया गया कि इन दोनों स्रोतों से आने वाले सीवेज के उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का काम 11 सितंबर 2026 से शुरू किया गया है। इसे 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर भी सवाल है कि एसटीपी तैयार होने तक लोअर लेक में जा रहे करीब आठ एमएलडी अनुपचारित सीवेज को रोकने की तत्काल व्यवस्था क्या है।

पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव को बनाया पक्षकार
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से बताया गया कि सीवेज उपचार और झील के विभिन्न हिस्सों के रखरखाव में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की भी भूमिका है। इस पर अधिकरण ने विभाग के प्रमुख सचिव को मामले में आवश्यक पक्षकार के रूप में शामिल किया। विभाग को आवेदन और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराकर 15 दिन में जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम को भी वेटलैंड की सुरक्षा, जलस्रोतों में अनुपचारित या अपशिष्ट जल के प्रवाह को रोकने और अवैध निर्माण हटाने के संबंध में 15 दिन में जवाब तथा कार्रवाई रिपोर्ट देनी होगी।

वेटलैंड में निर्माण का मामला भी उठा
आवेदक की ओर से विभिन्न निर्माणों और उनके संबंध में अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। अधिकरण ने संबंधित पक्षों को आवेदन की प्रति उपलब्ध कराने और जवाब या आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया है। वेटलैंड के भीतर किसी भी अनधिकृत निर्माण को रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें-एमपी में मौसम ने बदली चाल: 4 दिन बारिश पर ब्रेक, कई शहरों में तेज धूप, कई जिलों से विदाई के संकेत
विज्ञापन



पेड़ों को नुकसान पर 45 हजार का जुर्माना
भोपाल के प्रोफेसर कॉलोनी और सिविल लाइंस क्षेत्र में पेड़ों को रसायनों के जरिए नुकसान पहुंचाने का मामला भी सुनवाई में उठा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित भू-स्वामी को नोटिस जारी किया गया था। जवाब नहीं मिलने पर मध्यप्रदेश में शहरी क्षेत्रों में पेड़ों के संरक्षण से जुड़े कानून के तहत 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी दी गई। अधिकरण ने वन विभाग को भी पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने और अगली सुनवाई से पहले कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें