मध्यप्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। कई जिलों में बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। मंडला में नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़कर चेतावनी स्तर के पार पहुंच गया। उमरिया में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जोहिला बांध के पांच गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। राजधानी भोपाल में भी सुबह तेज बारिश के बाद दिनभर बादल छाए रहे और रिमझिम बारिश का दौर चलता रहा। मंडला में रविवार सुबह 9 बजे नर्मदा का जलस्तर 435 मीटर था। शाम 4 बजे तक यह बढ़कर 437.6 मीटर पहुंच गया और चेतावनी स्तर को पार कर गया। लगातार बारिश के कारण नदी और प्रमुख नाले उफान पर हैं।
बालाघाट में सवा दो इंच बारिश
बालाघाट में पिछले 24 घंटे में औसतन सवा दो इंच बारिश दर्ज की गई। बिरसा तहसील में सबसे ज्यादा करीब साढ़े तीन इंच पानी गिरा। जिले में तीन दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है और अब तक करीब 29 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। विदिशा जिले के पठारी क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। पठारी-छपारा मार्ग पर रहटी नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है।
भोपाल में सुबह तेज बारिश, फिर दिनभर रिमझिम
राजधानी भोपाल में रविवार को मौसम का मिजाज बदला रहा। सुबह तेज बारिश हुई, इसके बाद दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुककर हल्की बारिश होती रही। बारिश के कारण मौसम में ठंडक रही और लोगों को उमस से राहत मिली।
इन जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के मुताबिक श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल, हरदा, बैतूल, विदिशा, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, निवाड़ी, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, खंडवा, बुरहानपुर, देवास, शाजापुर, राजगढ़, आगर-मालवा, उज्जैन, खरगोन, इंदौर, नीमच, मंदसौर और रतलाम में शाम के समय गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।
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दतिया, रीवा और सीधी में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने दतिया, रीवा और सीधी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रदेश के ऊपर मानसून द्रोणिका सक्रिय है। पश्चिम बंगाल के आसपास बने मौसम तंत्र के प्रभाव से आने वाले दिनों में बारिश का दौर और तेज होने की संभावना है। 1 जून से 9 अगस्त तक प्रदेश में बारिश दीर्घावधि औसत से 19 प्रतिशत कम है। हालांकि पूर्वी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने से नदियों और बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।