सैलानियों, घुमक्कड़ और यायावर या नई-नई जगहों की तफरीह करने के शौकीनों की रुचि में बदलाव नजर आ रहे हैं। आमतौर पर खुली वादियों, पहाड़ों और नदियों या जंगल की तरफ जाने वाला पर्यटन अब धार्मिक स्थलों की तरफ बढ़ चला है। प्रदेश में दिखाई दे रहे इस बदलाव के बीच लोगों ने सबसे ज्यादा रुख महाकाल की नगरी उज्जैन की तरफ रहा है। पिछले 11 महीने के दौरान करीब छह करोड़ श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर पर दस्तक दी है।
जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश में बढ़ रहे धार्मिक पर्यटन के दौरान महाकाल लोक में सबसे ज्यादा लोगों की आमद हुई है। पिछले 11 महीने के आंकलन में यह आंकड़ा छह करोड़ पार है। बताया जा रहा है कि इस महीने के अंत वर्ष विदाई और अगले महीने की शुरुआत में नए साल का स्वागत करने वालों से यह श्रद्धालु संख्या और भी बढ़ सकती है।
टॉप 5 में भोपाल भी
पर्यटन मामलों में बढ़ रही संख्या के लिहाज से प्रदेश के टॉप-5 में भोपाल का नाम भी शामिल है। यहां के सुखद वातावरण, झीलों, हरियाली और ऐतिहासिक इमारतों के चलते यहां पर्यटक संख्या बढ़ रही है। भोपाल के अलावा इंदौर, मैहर और ओंकारेश्वर जैसी जगहों पर भी धार्मिक आस्थाओं के साथ पर्यटक पहुंच रहे हैं।
विदेशी पर्यटक खजुराहो, बांधवगढ़ से प्रभावित
प्रदेश में विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले आठ साल में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि पिछले 10 साल में खजुराहो और बांधवगढ़ पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या 10 करोड़, 66 लाख तक पहुंची है।
इस महीने बढ़ेगा आंकड़ा
वर्ष अंत और नए साल के जश्न पर पर्यटन संख्या में इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान उज्जैन महाकाल समेत प्रदेशभर के अन्य धार्मिक स्थलों पर भीड़ बढ़ने की संभावना है। धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरण से जुड़े कई पर्यटन स्थल प्रदेश में मौजूद हैं। इनमें मांडव, ओंकारेश्वर, महेश्वर, जावरा, पचमढ़ी, सांची, टाइगर रिजर्व और मैहर जैसी जगह शामिल हैं।