फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP News: जोश में कह गए कुछ, होश आया तो सफाई देते फिर रहे हज कमेटी अध्यक्ष; जानिए क्या है पूरा मामला

Sat, 14 Sep 2024 02:31 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

MP: अपनी बातों में पाकिस्तान को शामिल करने और उसका नाम लेकर उदाहरण देने... वक्फ बोर्ड से काम न होने और सिर्फ सियासत किए जाने... मुस्लिमों को वक्फ से फायदा न मिलने.... जैसी बातें कहकर विवादों में आए मप्र राज्य हज कमेटी अध्यक्ष रफत वारसी अब अपनी बात से मुकरते नजर आ रहे हैं। मेरा कहने का यह मतलब नहीं था... का सहारा लेकर वे अब सोशल मीडिया से लेकर पार्टी नेताओं के सामने तक खुद को नादान, मासूम और बेकुसूर बताने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन
मप्र राज्य हज कमेटी अध्यक्ष रफत वारसी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वक्फ एक्ट संशोधन बिल को लेकर जारी चर्चाओं के दौरान शुक्रवार को मप्र राज्य हज कमेटी अध्यक्ष रफत वारसी ने अपना पक्ष रखते हुए इस बदलाव की पैरवी की थी। लेकिन जोश में वे अपनी भाषा और शब्दों पर ध्यान नहीं रख पाए। उन्होंने नेशनल चैनलों को दिए इंटरव्यू में जहां वक्फ जमीनों की तादाद का हवाला देते के लिए पाकिस्तान के क्षेत्रफल का हवाला दे डाला। वहीं वक्फ बोर्ड में मची धांधली को परिभाषित करने के लिए वर्तमान बोर्ड को घेरे में ले लिया। इस दौरान वे यह भूल गए कि जिस बोर्ड में माफिया राज और यहां से काम की बजाए सियासत होने की बात कह रहे हैं, वह वर्तमान में उनकी अपनी पार्टी भाजपा के पदाधिकारियों की मौजूदगी से सजा हुआ है।

विज्ञापन


अब मची खलबली 
हज कमेटी अध्यक्ष रफत वारसी के बयान को लेकर मीडिया पर प्रकाशित और प्रसारित खबरों ने जहां कांग्रेस को बातें उठाने का मौका दे दिया है। वहीं इन बयानों को भाजपा संगठन ने भी पार्टी लाइन से बाहर माना है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले को लेकर संगठन पदाधिकारियों ने रफत से जवाब तलब कर लिया है। इसके बाद रफत वारसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इस खबर और अपने बयान का खण्डन करते हुए अपनी जान बचाने की जुगत लगाना शुरू कर दिया है। हालांकि इस दौरान वे यह भूल गए कि उनकी कही बातें नेशनल न्यूज चैनल से लेकर कई अखबारों और न्यूज पोर्टल पर लहरा चुका है। टीवी चैनलों के पास इसके वीडियो भी मौजूद हैं और यह उनकी सोशल साइट्स पर भी चल रहे हैं।

मिल गया था जीवनदान
प्रदेश की पिछली सरकार में बनाए गए निगम मंडल को नई सरकार बनने के बाद वर्ष 2023 में भंग कर दिया गया था। इस दौरान एक ही आदेश में प्रदेश के सभी निगम मंडलों के पदाधिकारी अपदस्थ कर दिए गए थे। लेकिन इस आदेश से मप्र वक्फ बोर्ड और मप्र राज्य हज कमेटी को अलग रखा गया था। सूत्रों का कहना है कि मप्र वक्फ बोर्ड का गठन अदालत के आदेश पर हुआ था। साथ ही यहां पदाधिकारियों का चयन भी निर्वाचन पद्धति से किए जाने के चलते राहत मिलना लाजमी थी। लेकिन बताया जाता है कि हज कमेटी को बचाने के लिए नियमों की गलत व्याख्या कर दी गई। इस कमेटी के सभी सदस्यों का मनोनयन शासन द्वारा किया जाता है। महज अध्यक्ष के चुनाव की खानापूर्ति के लिए सदस्यों से उनकी राय ली जाती है। हालांकि यह चयन भी पार्टी लाइन से तय किए गए नाम पर सहमति जताने भर के लिए होती है। इस लिहाज से यह चुनाव प्रक्रिया निगम मंडल की नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर नहीं कही जा सकती है।

भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें