मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 'अमर उजाला संवाद' कार्यक्रम के मंच से आपातकाल, तीन तलाक और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर तीखे शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश में आपातकाल की नींव 1975 में उस समय पड़ी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चुनाव में अनुचित तरीके अपनाए।
'कोर्ट ने अवैध ठहराया था इंदिरा गांधी का चुनाव'
मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया था। इसके 13 दिन बाद उन्होंने सुबह 6 बजे कैबिनेट बैठक बुलाकर आपातकाल लगाने का फैसला किया, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा, "जिसे अपने आप को राजा महाराजा समझने का घमंड हो, वह लोकतंत्र, संविधान और अदालत को भी दरकिनार कर देता है।"
शाह बानो केस और तीन तलाक पर भी बोले सीएम
मोहन यादव ने इंदौर से जुड़े शाह बानो केस का जिक्र करते हुए कहा कि 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया था, उसे इंदिरा गांधी सरकार ने पलट दिया। उन्होंने कहा कि बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू किया। साथ ही राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी मोदी सरकार ने पूरी तरह लागू किया।
'राहुल गांधी को राजनीतिक शिष्टाचार नहीं आता'
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी सीधा निशाना साधते हुए कहा, "नेता प्रतिपक्ष का पद बहुत गरिमामय होता है, जिसे अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने आदर और मर्यादा के साथ निभाया। लेकिन राहुल गांधी को न सत्ता में रहते और न विपक्ष में रहते कोई राजनीतिक शिष्टाचार आता है।"
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उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में उनके कैबिनेट के फैसले को सार्वजनिक रूप से फाड़कर लोकतंत्र का अपमान किया था। वहीं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर राहुल गांधी ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो अब तक किसी विदेशी नेता ने भी भारत के लिए नहीं बोले। 'नरेंद्र सरेंडर' जैसे शब्दों से उन्होंने देश का अपमान किया है।
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आपातकाल आयोजन राहुल गांधी जैसे नेताओं को जागरूक करने के लिए'
सीएम ने कहा कि आपातकाल से जुड़े जो आयोजन हो रहे हैं, उनका उद्देश्य सिर्फ जनता को नहीं, बल्कि राहुल गांधी जैसे ‘नादान नेताओं’ को भी यह समझाना है कि उनके परिवार ने इतिहास में किस तरह की गंभीर गलतियां की हैं।