पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती लोधी समाज से आती हैं और यह समाज भाजपा का मजबूत वोटबैंक रहा है। उमा भारती के इस बयान से साफ है कि उनके करीबी प्रीतम लोधी के भाजपा से निष्कासन के मुद्दे पर वह नाराज है। मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की तेजतर्रार नेत्री उमा भारती की अपनी ही पार्टी से तल्खी लगातार बढ़ रही है। शराबबंदी पर शिवराज सरकार की टेंशन बढ़ा रहीं उमा ने अब लोधी समाज से अपने हितों का ध्यान में रखकर वोट देने की अपील की है। ऐसे में चर्चा इस बात पर छिड़ गई है कि आखिर समाज के लिए उमा ने ऐसा संदेश क्यों दिया? अगर लोधी समाज भाजपा से छिटका तो अगले विधानसभा चुनावों में पार्टी को क्या नफा-नुकसान हो सकता है?
जानकार बताते हैं कि उमा भारती को पार्टी में महत्व नहीं मिल रहा है। उनकी पूछ-परख भी कम हुई है। इसी वजह से भले ही वह पार्टी नेतृत्व की तारीफ करें, लेकिन उनकी दूरियां लगातार बढ़ी है। उमा भारती को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके करीबी प्रीतम लोधी ने ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी के बाद माफी मांग ली थी। इसके बाद भी उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इस बात को लोधी समाज में स्वीकार नहीं किया गया है। इसे लेकर लोधी समाज के पदाधिकारी 2023 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को सबक सिखाने का अल्टीमेटम भी दे चुके हैं।
मध्यप्रदेश की राजनीति में लोधी समाज का क्या महत्व है?
मध्यप्रदेश की करीब 50 विधानसभाओं में लोधी समाज जीत-हार तय करने की स्थिति में है। ज्यादातर सीटें बुंदेलखंड इलाके में हैं, जहां से उमा भारती ताल्लुक रखती हैं। विंध्य में गुड और नागौर, मालवा में महू में भी लोधी समाज का अच्छा-खासा वोट है। नरसिंहपुर विधानसभा में लोधी वोट निर्णायक हैं। यूपी में भी 70 सीटें लोधी बाहुल्य हैं। राजस्थान, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश को मिलाकर 30-40 लोकसभा सीटों पर इनका वोट महत्वपूर्ण हो जाता है।
क्या कहा था उमा भारती ने?
उमा भारती शराबबंदी के लिए आंदोलन करने का एलान करने के साथ ही शराब दुकान पर पत्थर तक फेंक चुकी हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश की नई शराब नीति में बदलाव तक भवन त्याग का भी एलान किया था, लेकिन वह वापस ले लिया। अब उन्होंने लोधी समाज के कार्यक्रम में कहा कि वह समाज के लोगों से बीजेपी को वोट देने के लिए नहीं कहेंगी। उन्होंने कहा कि समाज वोट देते वक्त अपने हितों का ख्याल जरूर रखें।
उमा का बयान क्या मायने रखता है
वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित कहते हैं कि उमा भारती ने अपनी बिरादरी को साफ संदेश दिया है कि बीजेपी के भरोसे मत रहना। उनकी लोधी समाज में मजबूत पकड़ है। वे दो साल से शराबबंदी का मुद्दा उठा रही हैं। फिर नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान की तारीफ भी करती हैं। इसके बाद भी उन्हें कोई पूछ नहीं रहा है। इस वजह से दबाव बनाने के लिए वह यह सब कर रही हैं। उमा भारती का बयान मध्यप्रदेश की राजनीति में मायने रखता है।