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छोटे अखाड़े में बड़े पहलवान: क्या भाजपा ने इच्छा न होने के बाद भी बड़े नेताओं को टिकट दिया? क्या है इसके मायने

Wed, 27 Sep 2023 07:28 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं थी। मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि मैं उम्मीदार हूं। मुझे नहीं लग रहा कि मुझे टिकट मिल गया और पार्टी ने मुझे टिकट दिया।
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भाजपा उम्मीदवार प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय और नरेंद्र सिंह तोमर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत सात सांसदों को प्रत्याशी बनाया है। साथ ही राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक -1 से चुनाव मैदान में उतारा है। नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, फग्गनसिंह कुलस्ते, राकेश सिंह, राव उदय प्रताप सिंह, गणेश सिंह और रीति पाठक को भी चुनाव मैदान में उतारा है। यानी केंद्र की राजनीति करने वाले चेहरों को राज्य की राजनीति में उतारा गया है। यह कदम न केवल कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक पंडितों को चौंका गया, बल्कि यह नेता भी कम हैरान नहीं है। उनके बयानों में भी यह बात सामने आ रही है। 

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कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में कहा कि मेरी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं थी। मैंने तो प्लान बनाया था कि दिन में आठ भाषण देना है। पांच हेलिकॉप्टर से और तीन कार से और फिर निकल जाना है। प्लान बनाया था कि रोज आठ सभा करनी हैं। मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि मैं उम्मीदवार हूं। मुझे अब तक यकीन नहीं हो रहा है कि मुझे टिकट मिल गया है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी विधानसभा चुनाव लड़ाए जाने से बहुत खुश नहीं दिख रहे। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को टिकट दिया है तो यह साफ हो गया है कि उनके विधायक भाई जालम सिंह पटेल का टिकट कट गया है। चार बार के सांसद प्रहलाद पटेल इस मामले में पार्टी के फैसले को ही सर्वोपरि बता रहे हैं। खुलकर नाराजगी भी जाहिर नहीं कर पा रहे हैं। मध्य प्रदेश में पिछले 20 साल में से 18 साल भाजपा की सत्ता रही है। ऐसे में प्रदेश में सत्ता-विरोधी लहर से मुकाबला करने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने अपने गढ़ के साथ-साथ 2018 और उसके बाद हारी सीटों पर फोकस बढ़ाया है। 

केंद्रीय नेताओं को टिकट देकर क्या संदेश दिया भाजपा ने?
भाजपा ने 2018 के चुनावों में मिली हार से सबक लेकर इस बार क्षेत्रीय नेताओं को ज्यादा तवज्जो दी है। हर बार जन आशीर्वाद यात्रा सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  ही निकालते थे। इस बार उसका विकेंद्रीकरण किया गया। पांच अलग-अलग यात्राएं निकाली गई। उसकी जिम्मेदारी भी क्षेत्रीय नेताओं के कंधे पर दी थी। केंद्रीय नेताओं को टिकट देकर इसी रणनीति को आगे बढ़ाया गया है। पार्टी का सोचना है कि यह नेता न केवल हारी सीट पर भाजपा का परचम फहराएंगे, बल्कि उनकी मौजूदगी का असर पूरे क्षेत्र पर दिखाई देगा। दरअसल, जिन 79 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए गए हैं, उनमें से सिर्फ तीन पर भाजपा के विधायक हैं। पार्टी ने हारी सीटों को फिर जीतने के लिए दिग्गज नेताओं को उतारा है।  
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नरेंद्र सिंह तोमर के सामने बड़ी चुनौती 
मुरैना से सांसद नरेंद्र सिंह तोमर को जिले की दिमनी सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। जिले में दिमनी के अलावा मुरैना, अंबाह, सुमावली, जौरा और सबलगढ़ कुल छह विधानसभा सीट है। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे मुरैना में बसपा का प्रभाव है। दिमनी सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। यहां पर 1962 से 2018 तक सबसे ज्यादा छह बार भाजपा जीती है। तोमर के सामने चुनौती यह होगी कि वह अपनी सीट पर प्रचार करें और वहीं से ग्वालियर-चंबल की अन्य सीटों पर प्रभाव डालें। पार्टी को उम्मीद है कि तोमर जैसा नेता ग्वालियर-चंबल में कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में भी मददगार साबित होंगे।  

प्रहलाद पटेल पहली बार लड़ेंगे विधानसभा चुनाव  
चार बार के सांसद प्रहलाद सिंह पटेल पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्हें नरसिंहपुर से उनके भाई जालम सिंह का टिकट काटकर प्रत्याशी बनाया है। नरसिंहपुर महाकौशल का हिस्सा है। पार्टी का 2018 में प्रदर्शन ठीक नहीं था। प्रहलाद पटेल ओबीसी के बड़े नेता हैं। यहां पर ओबीसी वर्ग को साधने के लिए पार्टी ने नई रणनीति अपनाई है। यदि नरसिंहपुर की बात करें तो यहां पर पिछले चार चुनाव में तीन बार भाजपा और एक बार कांग्रेस ने चुनाव जीता है। जबलपुर पश्चिम से सांसद राकेश सिंह को दो बार से चुनाव जीत रहे कांग्रेस विधायक को हराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

आदिवासी वोटरों को साधने कुलस्ते को टिकट
भाजपा ने महाकौशल में आदिवासियों को साधने के लिए केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को टिकट दिया है। महाकौशल की 38 सीटों में से 24 पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। भाजपा ने 13 और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी। महाकौशल में अनुसूचित जनजाति के लिए 13 सीटें आरक्षित हैं। इनमें 11 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। भाजपा की रणनीति महाकौशल में कुलस्ते को आगे बढ़ाकर आदिवासी सीटों पर कब्जा जमाने की है।

विजयवर्गीय डालेंगे इंदौर की नौ समेत मालवा-निमाड़ की सीटों पर असर
भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक एक से उम्मीदवार बनाया है। यह सीट भी लंबे समय से भाजपा के कब्जे में रही है। 2018 में जरूर कांग्रेस के संजय शुक्ला यहां से जीते थे। भाजपा की रणनीति है कि इंदौर-1 के साथ ही मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर भी कैलाश विजयवर्गीय असर दिखाएं। इंदौर-3 से विजयवर्गीय के बेटे आकाश अभी विधायक हैं। विजयवर्गीय के बाद अब आकाश को टिकट मिलने की संभावना कम है। सीधी में रीति पाठक को टिकट देकर ब्राह्मण वोटर्स को साधने की कोशिश की गई है। यहां पर आम आदमी पार्टी भाजपा के लिए चुनौती बनती जा रही है। सांसद गणेश सिंह को सतना से टिकट देकर ओबीसी वर्ग को साधने की कोशिश की है। 

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