मध्य प्रदेश के उपचुनावों के दौरान राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ग्वालियर में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सिंघार का दावा है कि भाजपा ने उन्हें 50 करोड़ रुपये की पेशकश की थी, साथ ही कैबिनेट मंत्री बनाने का ऑफर भी दिया गया था। उन्होंने कहा कि मैंने इसे ठुकरा दिया। मैं जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझता हूं। जो नेता जनता का विश्वास तोड़कर बिक जाते हैं, वे टिक नहीं पाते। जनता को सब पता है और फैसला लेने में उससे बड़ा कोई नहीं। उमंग सिंघार ने भाजपा में शामिल हुए और विजयपुर से प्रत्याशी प्रदेश के वन मंत्री रामनिवास रावत पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रामनिवास रावत भाजपा में क्यों गए? यह हम सभी जानते हैं। जिस प्रकार वह कर्ज में डूब गए थे, उनके सब काम धंधे बंद हो गए थे। उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी और जनता के विश्वास को उन्होंने अपने फायदे के लिए बेच दिया। सिंघार ने आगे कहा कि निश्चित तौर पर जनता इस बात को समझती है कि जो बिकाऊ होता है, वह टिकाऊ नहीं होता। इसलिए मैं समझता हूं कि इस विषय पर जनता उन्हें घर जरूर भेज देगी।
11 साल से लोकायुक्त में भाजपा नेताओं की फाइलें दबा रखी हैं
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार और चुनावी षड्यंत्र का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों से लोकायुक्त में भाजपा के मंत्रियों और उनके समर्थक अधिकारियों के भ्रष्टाचार की फाइलें दबाकर रखी गई हैं, जिन्हें अब तक विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया है। साथ ही, सरकार पर विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में षड्यंत्रपूर्वक जीतने का भी आरोप लगाया। उमंग सिंघार ने कहा कि विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में वन विभाग के उप सचिव किशोर कान्याल को श्योपुर का कलेक्टर बनाकर भेजा गया है, जिनके माध्यम से सरकार मंत्री रामनिवास रावत का पक्ष लेने की कोशिश कर रही है। इस मामले में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए किशोर कान्याल को कलेक्टर पद से हटाने की मांग की है। सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौनता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के एक मंत्री ने ग्वालियरवासियों को स्वच्छ पीने के पानी की गारंटी देने के बजाय बिसलेरी से पानी की सप्लाई की बात कही थी, लेकिन तत्कालीन मंत्री गौरीशंकर बिसेन मंत्री नहीं हैं।