प्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अगली बाघ गणना में प्रदेश में बाघों की संख्या 1000 से अधिक होने का अनुमान है। वर्ष 2022 की गणना में प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा कि सरकार जनभागीदारी के साथ प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा बाघ संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। 53 साल पहले प्रदेश में बाघों की संख्या दहाई के आंकड़े में सिमट गई थी, लेकिन अब इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
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नौ टाइगर रिजर्व में संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में बाघों के साथ चीता, घड़ियाल, जंगली भैंसा और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी काम किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 9 टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं। वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों और वन समितियों को भी संरक्षण के काम से जोड़ा है। उन्होंने बताया कि चंबल में घड़ियाल संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। कूनो क्षेत्र की नदियों में भी घड़ियाल छोड़े गए हैं। करीब 100 साल पहले प्रदेश से विलुप्त हो चुके जंगली भैंसे को फिर से बसाने का काम भी सफल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही गैंडे भी लाए जाएंगे।
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28 लाख पर्यटक पहुंचते है हर साल
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव समिता राजौरा ने बताया कि मध्यप्रदेश में हर साल करीब 28 लाख वन्यजीव पर्यटक आते हैं। इनमें करीब एक लाख विदेशी पर्यटक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बाघों के संरक्षण में स्थानीय लोगों और वन समितियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
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नई किताबों और टाइगर रिजर्व के लोगो का विमोचन
कार्यक्रम में सतपुड़ा की तितलियों, कान्हा की घास प्रजातियों, वन्यजीव रेस्क्यू और मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की बेहतर व्यवस्थाओं पर आधारित पुस्तकों का विमोचन किया गया। रातापानी और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के लोगो भी जारी किए गए। मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट काम करने वाली वन सुरक्षा समितियों, इको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों और वनकर्मियों को सम्मानित किया। पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास और मोहन नागर का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बाघ संरक्षण पर नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की।