राजधानी के पश्चिमी हिस्से में बनने जा रहा करीब 36 किलोमीटर लंबा छह लेन बायपास अब जमीन पर उतरने की तैयारी में है। परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले दो-तीन महीनों में निर्माण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है, लेकिन दूसरी ओर इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की आशंका ने पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एमपीआरडीसी के आंकड़ों में इस परियोजना के लिए करीब 3,200 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित बताई जा रही है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आकलन इससे काफी ज्यादा है। खासकर कोलार क्षेत्र से जुड़े नौ गांवों में ही 8 हजार से अधिक पेड़ों के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में पेड़ों की वास्तविक संख्या को लेकर सरकारी आंकड़ों और जमीनी आकलन में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
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35.6 किमी की मुख्य सड़क, दोनों ओर सर्विस रोड
परियोजना के तहत करीब 35.611 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। इसमें चार मुख्य लेन के साथ दोनों ओर दो लेन की सर्विस रोड होगी, जिससे पूरा मार्ग छह लेन का होगा। सड़क 11 मील के पास कोलार तहसील के रतनपुर सड़क गांव से शुरू होकर फंदाकला के पास भोपाल-देवास मार्ग से जुड़ेगी। प्रस्तावित मार्ग समसगढ़, समसपुरा और रातीबढ़ क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इसका उद्देश्य नर्मदापुरम और इटारसी की ओर से इंदौर जाने वाले भारी वाहनों को भोपाल शहर में प्रवेश किए बिना वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है।
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45 हेक्टेयर वन क्षेत्र आएगा चपेट में
परियोजना में कुल 45 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होने की जानकारी है। इसमें अकेले कोलार क्षेत्र में करीब 28 हेक्टेयर वन भूमि आने की बात सामने आई है। रतनपुर सड़क, गुराड़ीघाट, थुआखेड़ा, महावड़िया और कालापानी क्षेत्र में घना वन क्षेत्र है। यही इलाके पेड़ों की संख्या के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जा रहे हैं। क्षतिपूर्ति के तौर पर एमपीआरडीसी ने अमझरा में 90 हेक्टेयर जमीन की मांग की है। यहां करीब 32 हजार पौधे लगाने की योजना बताई गई है।
सरकारी सूची में कई गांवों में पेड़ों की संख्या कम
प्रशासन की रिपोर्ट में कई गांवों में पेड़ों की संख्या अपेक्षाकृत कम बताई गई है। रतनपुर सड़क में 30, सेमरीकलां में 15, पिपलिया कैशी में 50, गुराड़ीघाट में 40, नरेला में 150, मुंडला में 70 और जाटखेड़ी में 84 पेड़ चिन्हित किए गए हैं। वहीं समसपुरा में 54, दूबड़ी में 52, आंवला और हताईखेड़ी में 50-50 तथा फंदाकला में 25 पेड़ दर्ज हैं। इन आंकड़ों को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कई हिस्से सघन वन क्षेत्र में आते हैं। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रशासन ने पूरी की है। संबंधित ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट में भी भागीदारी रही है। अब परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने का लक्ष्य है।