सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण एवं विकास के लिए आपसी समन्वय और सहयोग बढ़ाने के प्रण के साथ यूनेस्को का दो दिवसीय उप क्षेत्रीय सम्मेलन मंगलवार को समापन हो गया। इसमें हुए मंथन से तैयार हुआ दस्तावेज ‘द भोपाल विजन स्टेटमेंट’ कहलाएगा। इसे विश्व धरोहर संरक्षण को नया आयाम देने वाला बताया गया।
भोपाल दृष्टिकोण पत्र में विश्व विरासत संरक्षण में स्थानीय समुदाय और सिविल सोसायटी की भूमिका और उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही विरासतों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक प्रथाओं में शामिल करना आदि महत्वपूर्ण विषयों पर दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों के महत्वपूर्ण विचार एवं सुझाव शामिल किए गए। इसमें प्रमुख रूप से लोगों एवं धरोहरों के बीच मजबूत संबंधों के माध्यम से ही सतत एवं स्थायी विकास को संभव बताया गया है।
हेरिटेज वॉक से शहर की ऐतिहासिक विरासत को जाना
भोपाल शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराने के लिए यूनेस्को क्षेत्रीय सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों के लिए मंगलवार को सुबह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। 'विश्व धरोहर दिवस' के उपलक्ष्य में प्रतिनिधियों को शहर के इतिहास, संस्कृति, धरोहरों एवं प्राकृतिक सौंदर्य से अवगत कराया गया। वॉक का रूट कमला पार्क से प्रारंभ होकर, राजाभोज सेतु, गौहर महल, इंडियन टी हाउस से होते हुए इकबाल मैदान, सदर मंजिल था। प्रतिनिधियों को शहर का इतिहास, भाषा, रीति-रिवाज, वास्तुकला, कला और संस्कृतियों की विविधताओं की जानकारी दी गई।
प्रदर्शनी में दिखी प्रदेश की संस्कृति की झलक
मप्र टूरिज्म बोर्ड ने कन्वेंशन सेंटर परिसर में प्रदर्शनी लगाई। इसमें मप्र रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म मिशन के तहत संचालित की जा रही परियोजनाओं जैसे महिला हेतु सुरक्षित पर्यटन परियोजना, होम स्टे योजना, रिस्पॉन्सिबल सोवेनियर परियोजना, कौशल विकास इत्यादि की जानकारी दी गई। इसके साथ ही गोंड एवं भील पेंटिंग, मध्य प्रदेश माटी कला बोर्ड और माहेश्वरी हैंडलुम की लाइव प्रदर्शनी लगाई गई। प्रतिनिधियों ने हथकरघा पर हाथ आजमाया और मिट्टी के बर्तन बनाना भी सीखे।
सम्मेलन के दौरान थीमेटिक सेशन में देशों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने विरासतों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, नई तकनीक से विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के विषय पर विचार मंथन किया।