नागदा में दिलीप सिंह शेखावत के समर्थन में उतरे लोग
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मध्य प्रदेश भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए पहली सूची के बाद 40 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है। इसमें केंद्रीय मंत्रियों समेत सात सांसद शामिल है। इस सूची आने के बाद भाजपा में सतना, सीधी, श्योपुर और नागदा में विरोध शुरू हो गया है। नागदा में टिकट को लेकर खुलकर विरोध शुरू हो गया है।
मंगलवार को पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत के समर्थन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित हुए। उन्होंने शेखावत के समर्थन में नारेबाजी की। यहां से भाजपा ने तेज बाहदुर सिंह को प्रत्याशी बनाया है। इसके विरोध में कई पार्षद, जनपद सदस्य, जिला पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने अपना इस्तीफा संगठन को सौंप दिया। इसमें उन्होंने लिखा कि हम सभी अपना इस्तफा दे रहे हैं। जिस व्यक्ति ने सतत पार्टी को अपने खून पसीने से सींचा। ऐसे योग्य व्यक्ति को टिकिट ना देने से हम बहुत आहत हैं। इस निर्णय के विरोध में हम भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं।
निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा
भाजपा ने सतना से अपना उम्मीदवार सांसद गणेश सिंह को बनाया है। यहां से टिकट के दावेदार रत्नाकर सिंह ने गणेश सिंह को उम्मीदवार बनाने का विरोध किया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि कोरोना काल में कोई मैदान में नहीं आया। मेरी मेहनत का पार्टी ने मुझे यह फल दिया। उसका तहे दिल से शुक्रिया। उन्होंने कहा कि यदि जनता की इच्छा होगी तो मैं निर्दलीय चुनाव लडूंगा।
सीधी में भी विरोध में इस्तीफा
सीधी में भाजपा ने वर्तमान विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट काट दिया है। यहां पार्टी ने सांसद रीति पाठक का उम्मीदवार बनाया है। सीधी से डॉक्टर राजेश मिश्रा टिकट के लिए दोवदारी कर रहे थे। रीति पाठक को टिकट मिलने के बाद उन्होंने भाजपा प्रदेश कार्य समिति की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
श्योपुर में पूर्व जिला अध्यक्ष का इस्तीफा
भाजपा ने श्योपुर से पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय को प्रत्याशी बनाया है। 71 साल के दुर्गालाल का विरोध शुरू हो गया है। दुर्गालाल विजय अब तक यह विधानसभा चुनावों में भाजपा के टिकट पर 5 बार चुनाव लडे हैं, जिनमें साल 2003 और 2013 यानी 2 चुनाव वह जीते और तीन 2 बार के चुनाव वह हार गए उनको प्रत्याशी बनाने पर पूर्व जिला अध्यक्ष राधेश्याम रावत ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने जिला अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि प्रदेश के नेताओं की मनमानी के कारण एक ही व्यक्ति को 30 साल से प्राथमिकता दी जा रही है। यहां से परिवर्ततन की मांग लगातार की जा रही है। भाजपा ने मीणा समाज के व्यक्ति को प्रत्याशी नहीं बनाया।