मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन जन विश्वास संशोधन विधेयक पारित हो गया। इस बिल के जरिए प्रदेश में विभिन्न मामलों में जनता को राहत मिलने की उम्मीद है। अब कोर्ट के मामलों में कमी आएगी और कई मामूली मामलों का समाधान अधिकारी मौके पर ही कर सकेंगे। साथ ही, जुर्माना वसूलने का अधिकार भी अधिकारियों को मिलेगा। इस विधेयक के अनुसार, बिना अनुमति नगरीय क्षेत्रों में दीवार लेखन या पर्चा चिपकाने वालों को अब कोर्ट की कार्रवाई से राहत मिलेगी, लेकिन उन्हें 2000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। इसके तहत संबंधित मामले कोर्ट तक नहीं जाएंगे और अधिकारी मौके पर ही जुर्माना लगाने के अधिकार से लैस होंगे।
ऊर्जा विभाग के तहत, कैप्टिव पावर प्लांट का उपयोग करने वाले व्यक्तियों को उत्पादन और खपत का लेखा-जोखा न रखने पर अब 5000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। पहले इस पर अलग-अलग जुर्माने की सीमा थी, जिसे अब एक समान कर दिया गया है। नगरीय विकास विभाग ने यह प्रावधान किया है कि यदि पानी की नाली या सड़क को निजी उपयोग के लिए क्षतिग्रस्त किया जाता है, तो जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया जाएगा। इसी तरह, निजी भूमि पर प्लाटिंग के लिए चूने की लाइन डालने जैसे मामलों में भी कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।
क्या है जन विश्वास संशोधन विधेयक?
जन विश्वास संशोधन विधेयक के तहत, सात विभागों जैसे नगरीय प्रशासन, ऊर्जा, सहकारिता, श्रम आदि में जुर्माने को पेनल्टी में बदलने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले इन मामूली मामलों को कोर्ट में प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन अब अधिकारी मौके पर ही इनका समाधान कर सकेंगे, जिससे कोर्ट में मुकदमों की संख्या घटेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि इससे न केवल शासन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसरों में भी तेजी से बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए राज्य में विकास और सुशासन के नए अध्याय की शुरुआत होगी।
केंद्र सरकार के जन विश्वास अधिनियम, 2023 से यह विधेयक प्रेरित है जिसने राष्ट्रीय स्तर पर 42 केंद्रीय अधिनियमों में 183 प्रावधानों को अपराध-मुक्त किया। इसने छोटे अपराधों को गैर-अपराधीकरण करते हुए, दंड प्रणाली को तर्कसंगत बनाया और नागरिकों व उद्यमियों के लिए नियामकीय बाधाओं को दूर किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस विधेयक को राज्य की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग रैंकिंग को और मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम बताया। उन्होंने कहा, यह विधेयक मध्यप्रदेश में शासन और विकास का नया अध्याय लिखेगा, जिससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। सरकार ने विधेयक में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। अब छोटे अपराधों के लिए जेल भेजने की अपेक्षा जुर्माने से दण्डित किया जाएगा। पुराने और जटिल कानूनों को हटाकर, कानूनी ढांचे को समय के अनुसार अपडेट किया गया है। इससे आम जनता और उद्यमियों को यह विश्वास होगा कि सरकार उनके साथ खड़ी है और उनके काम को आसान बनाना चाहती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में कई सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं। सरकार ने 920 पुराने और अतार्किक हो चुके कानूनों को खत्म किया है, जिससे कानूनी प्रक्रिया सरल और तेज हुई है। स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं लागू की गई हैं, जिनसे युवाओं और महिलाओं के स्टार्ट-अप में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि यह विधेयक न केवल एक कानूनी बदलाव है, बल्कि जनता और सरकार के बीच भरोसे का एक मजबूत पुल है। जब कानून सरल होंगे और अनुपालन में कठिनाई नहीं होगी, तो निवेश भी बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह पहल मध्यप्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। सरकार का यह प्रयास राज्य में शासन और विकास का एक नया मॉडल पेश करेगा, जिससे हर वर्ग को लाभ होगा।
यह है प्रमुख संशोधन-
विधेयक में राज्य के 5 विभागों (औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, ऊर्जा, सहकारिता, श्रम, नगरीय विकास एवं आवास) के 8 अधिनियमों में 64 धाराओं में संशोधन किया गया है। इनमें कारावास को जुर्माने में बदलने, दंड को शास्ति में परिवर्तित करने और कंपाउंडिंग (शमन) प्रावधान जोड़ने जैसे सुधार शामिल हैं। अप्रचलित कानूनों का उन्मूलन: 920 अप्रचलित अधिनियम समाप्त किए गए।
व्यावसायिक क्षेत्र में काम आसान एवं त्वरित गति से होंगे। महिला नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप में 157% और कुल स्टार्ट-अप में 125% वृद्धि। GIS आधारित भूमि आवंटन प्रणाली और संपदा 2.0 जैसी पहलों से प्रक्रिया सुगम बनी। विधेयक में राज्य के 05 विभागों के 08 अधिनियमों में 64 उपबंधों में संशोधन है :
जन विश्वास विधेयक लागू होने से छोटे अपराधों का गैर-अपराधीकरण होने से न्यायपालिका का भार कम होगा। अनुपातिक और प्रभावी दंड व्यवस्था लागू होगी। अनुपालन प्रक्रिया को सरल होने से व्यवसाय-अनुकूल वातावरण बनेगा जिससे उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा। यह विधेयक न केवल कानूनी प्रक्रिया में सुधार है, बल्कि यह नागरिकों और उद्यमियों के लिए सरकार के विश्वास और सहयोग का प्रतीक है। मध्यप्रदेश जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक-2024, मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शिता और सुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पहल विकास और सुशासन के नये आयाम स्थापित करेगी।