विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार 2020 से 28 जनवरी 2026 तक मध्य प्रदेश में 2.70 लाख से अधिक महिलाएं और बालिकाएं लापता दर्ज हुईं, जिनमें से 50,170 का अब तक कोई सुराग नहीं लगा है। कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने इसे महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल बताते हुए सरकार को घेरा, जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने मामले की समीक्षा करने की बात कही।
मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के आंकड़ों को लेकर विधानसभा से सड़क तक राजनीति गर्म हो गई है। कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के प्रश्न के लिखित जवाब में गृह विभाग ने वर्ष 2020 से 28 जनवरी 2026 तक के आंकड़े पेश किए, जिनमें कुल 2,70,300 महिलाएं और बालिकाएं लापता दर्ज हुई हैं।
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कुल आंकड़े (2020 से 28 जनवरी 2026 तक)
महिलाएं लापता: 2,06,507
बरामद महिलाएं: 1,58,523
अब तक पता नहीं: 47,984
बालिकाएं लापता: 63,793
बरामद बालिकाएं: 61,607
अब भी लापता: 2,186
यानी कुल मिलाकर 50,170 महिलाएं और बालिकाएं ऐसी हैं, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है।
साल-दर-साल बढ़ते मामले
2020 से 2025 के बीच हर साल मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
2024 में 50,798 मामले
2025 में 54,897 मामले
2026 में 28 जनवरी तक 4,197 मामले सामने आ चुके हैं।
भूरिया का आरोप
कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने इन आंकड़ों को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रदेश में महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता नहीं दिखा रही और यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने विशेष मॉनिटरिंग तंत्र और जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की।
महिला एवं बाल विकास मंत्री का जवाब
इधर, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता यह आंकड़ा कहां से आया है। जब उन्हें बताया गया कि यह जानकारी स्वयं सरकार ने विधानसभा में दी है, तो उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले को देखेंगे कि क्या स्थिति है।मंत्री ने कहा कि जहां भी इस तरह के मामले सामने आते हैं, सरकार कार्रवाई करती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लाडली बहनों और महिलाओं के हित में लगातार काम कर रही है और बजट में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।