लोकायुक्त संगठन भोपाल इकाई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के खिलाफ विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया है। लोकायुक्त द्वारा दर्ज अपराध क्रमांक 238/19 के तहत आलोक खरे पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 12, 13(1)(B), 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान यह पाया गया कि आरोपी ने अपने ज्ञात वैध आय स्रोतों की तुलना में काफी अधिक चल-अचल संपत्ति अर्जित की है। जांच पूरी होने के बाद लोकायुक्त ने आलोक खरे और उनकी पत्नी मिनाक्षी खरे दोनों के खिलाफ अदालत में अभियोग पत्र दायर किया है। सरकार ने 2024 में आलोक खरे के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी थी।
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2019 में 150 करोड़ की बेनामी संपत्ति का हुआ था खुलासा
बता दें लोकायुक्त ने 2019 में भोपाल, इंदौर, रायसेन और छतरपुर में आलोक खरे के सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान करीब 150 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ था। छापों में नकदी, सोना, फार्महाउस, बंगले और पेंटहाउस के दस्तावेज बरामद हुए थे। जांच में यह भी सामने आया था कि रायसेन के फार्महाउस में फलों की खेती से आय दिखाने के बावजूद, जिन ट्रकों से फल परिवहन दिखाया गया, वे वास्तव में ऑटो रिक्शा के नंबर पर पंजीकृत थे।
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तीन किलो सोना और कई आलीशान संपत्तियां मिली थीं
छापेमारी के दौरान तीन किलो सोना बरामद किया गया था। लोकायुक्त की जांच में भोपाल के चुनाभट्टी और बाग मुगालिया स्थित दो बड़े बंगले, कोलार में फार्महाउस की जमीन, और रायसेन जिले में दो फार्महाउस के दस्तावेज मिले थे। खरे की पत्नी द्वारा दाखिल आयकर विवरण में इन संपत्तियों से होने वाली आय को फलों की खेती के नाम पर दर्शाया गया था।