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MP News: जयभान सिंह पवैया बोले- गांवों और शहरों में संसाधनों के बेहतर बंटवारे के लिए बन रही व्यवहारिक नीतियां

Wed, 24 Jun 2026 08:48 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

राज्य वित्त आयोग गांवों और शहरों के बीच वित्तीय संसाधनों के बेहतर बंटवारे के लिए नई नीतियां तैयार कर रहा है। भोपाल में हुई बैठक में पंचायतों और नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया।
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राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने भोपाल में की बैठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि गांवों और नगरीय निकायों के बीच वित्तीय संसाधनों के बेहतर और व्यावहारिक बंटवारे के लिए नई नीतियां तैयार की जा रही हैं। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलकर गांवों की स्थिति सुधारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। भोपाल संभागायुक्त कार्यालय में आयोजित बैठक में आयोग ने भोपाल संभाग के कलेक्टरों, जिला पंचायत सीईओ, नगर निगम आयुक्तों और नगरीय निकायों के अधिकारियों के साथ पंचायतों और शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति, राजस्व स्रोतों, पारदर्शिता और आर्थिक स्वावलंबन पर विस्तार से चर्चा की।
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ग्राम पंचायतों के लिए अलग राजस्व व्यवस्था की जरूरत बताई
बैठक में संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए जिलों से प्रस्ताव तैयार कर भेजने का सुझाव दिया। वहीं भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने शहरीकरण की ओर बढ़ रही ग्राम पंचायतों के लिए अलग राजस्व व्यवस्था की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भोपाल जिले की लगभग 36 ग्राम पंचायतें शहरी स्वरूप ले चुकी हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त कर संग्रहण अधिकार नहीं हैं। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक गतिविधियों और आपदा प्रबंधन के लिए विशेष अनुदान देने का सुझाव भी रखा। 
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ग्राम पंचायतों से पांच करोड़ से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ 
जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने बताया कि भोपाल जिले में "टैक्स सखी" पहल के माध्यम से टैक्स संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया गया है, जिससे वर्ष 2025-26 में ग्राम पंचायतों को 5 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने पंचायत परिसंपत्तियों की जीआईएस टैगिंग का सुझाव भी दिया।

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राजस्व स्त्रोत बढ़ाने के उपायों पर हुई चर्चा 
बैठक में सीहोर, विदिशा, राजगढ़ और रायसेन के कलेक्टरों ने भी ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न सुझाव दिए। इनमें स्थानीय कर संग्रहण, भवन अनुमति, सामुदायिक परिसंपत्तियों का विकास, पुस्तकालय, उद्यान, गौशाला, तालाबों और बावड़ियों का संरक्षण, धार्मिक आयोजनों से राजस्व सृजन तथा आपदा प्रबंधन के लिए विशेष फंड की व्यवस्था शामिल रही। बैठक में पंचायतों और नगरीय निकायों के मूल दायित्वों, स्वच्छता, पेयजल, विकास कार्यों की गुणवत्ता और स्वयं के राजस्व स्रोत बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। आयोग ने स्थानीय निकायों को अधिक सक्षम, पारदर्शी और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।
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