मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी
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पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने सरकार की दो साल की उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने कहा कि भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश को सांस्कृतिक अभ्युदय के साथ विश्व पटल पर सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में विकास और सेवा के दो वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष मध्यप्रदेश में 14 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि है। यह आंकड़ा देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में आपको कई अद्वितीय और अभूतपूर्व कार्य देखने को मिलेंगे।
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प्रमुख उपलब्धियों में ओमकारेश्वर में एकात्म धाम परियोजना का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि प्रथम चरण में 108 फीट ऊंची आदि शंकराचार्य प्रतिमा स्थापित हो चुकी है और द्वितीय चरण में अद्वैत लोक के निर्माण के लिए 2424 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति मिल चुकी है। यह देश में अद्वैत/वेदांत दर्शन के लोकव्यापीकरण की अब तक की सबसे बड़ी योजना है। धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 सांस्कृतिक-धार्मिक लोक (महाकाल महालोक, श्रीरामराजा लोक, देवीलोक, श्रीराम वनवासी लोक, श्रीकृष्ण पाथेय आदि) का निर्माण तेजी से चल रहा है। ग्रामीण पर्यटन में क्रांति लाते हुए 400 से अधिक होमस्टे शुरू किए गए, जिनसे ग्रामीण परिवारों को 7 करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय प्राप्त हुआ। लक्ष्य 1000 होमस्टे का है।
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पर्यटन निवेश को बढ़ावा देने के लिए रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव और मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट जैसे आयोजनों से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। विभाग को पिछले दो वर्षों में 18 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले और संस्कृति क्षेत्र में 8 विश्व कीर्तिमान स्थापित हुए। आगामी लक्ष्यों में प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10 प्रतिशत तक बढ़ाना, 500 नए होटलों के माध्यम से 20 हजार अतिरिक्त कमरे, 500 मार्ग सुविधा केंद्र, 50 हजार महिलाओं/बालिकाओं का सेफ टूरिज्म प्रशिक्षण, भोपाल-इंदौर-महेश्वर को क्रिएटिव सिटी के रूप में विकसित करना और 10 नए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का नामांकन शामिल है। मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की 18 यूनेस्को विश्व धरोहरों की विरासत अब न केवल संरक्षण, बल्कि नवाचार और समावेशी विकास के साथ विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही है।