आस्था और सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा आज से आरंभ हो गया है। राजधानी भोपाल में घाटों पर उत्सव का वातावरण है। नगर निगम और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। घाटों पर साफ-सफाई, रंग-रोगन, विद्युत सजावट, चलित शौचालय, चेंजिंग रूम और पेयजल की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। इस वर्ष शीतलदास की बगिया, कमला पार्क, वर्धमान पार्क (सनसेट पॉइंट), खटलापुरा घाट, काली मंदिर घाट, प्रेमपुरा घाट, हथाईखेड़ा डैम, बरखेड़ा और घोड़ा पछाड़ डैम सहित कुल 52 घाटों पर छठ महापर्व का आयोजन होगा।
लाखों श्रद्धालुओं के घाटों पर पहुंचने की संभावना
भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि इस बार लाखों श्रद्धालुओं के घाटों पर पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि शहर के उत्तर भारतीय समुदाय में छठ पूजा को लेकर भारी उत्साह है। बाजारों में पूजा सामग्री, सूप-दऊरा, ठेकुआ मोल्ड, फल और साज-सज्जा की वस्तुओं की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। उन्होने बताया कि बिहार के सुप्रसिद्ध लोक गायिका रूबी कुमारी 27 अक्टूबर समय 3 बजे स्थान शीतल दास की बगिया कमला पार्क में शामिल होंगी।
प्रशासन और पुलिस की तैयारियां पूरी
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने पुलिस बल, गोताखोर दल और मेडिकल सहायता केंद्रों की व्यवस्था की है। ट्रैफिक पुलिस ने प्रमुख घाटों के आसपास पार्किंग और रूट डायवर्जन प्लान लागू किया है। घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग और कंट्रोल रूम बनाए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता दी जा सके।
चार दिवसीय छठ पर्व का पूरा क्रम
25 अक्टूबर- नहाय-खाय: श्रद्धालु स्नान कर शुद्ध भोजन (कद्दू-भात) ग्रहण करते हैं, जिससे व्रत की शुरुआत होती है।
26 अक्टूबर- खरना: व्रती उपवास रखकर शाम को गुड़ की खीर और गेहूं की रोटी का प्रसाद बनाते हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
27 अक्टूबर- डाला छठ (सांझी अर्घ्य): अस्त होते सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है। घाटों पर श्रद्धालु ठेकुआ, फल और प्रसाद से पूजा करते हैं।
28 अक्टूबर- भोर अर्घ्य और पारण: उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही उपवास समाप्त होता है। व्रती छठ का प्रसाद खाकर पारण करती हैं और फिर परिवारजन भोजन करते हैं।
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पहला दिन नहाय-खाय
कुंवर प्रसाद ने बताया कि पहला दिन नहाय-खाय के दिन नदी में स्नान करके कद्दू-भात बनाया जाता है। इस दिन छठ व्रत करने वाली महिलाएं सुबह गंगा स्नान कर नए वस्त्र पहनती हैं। कद्दू यानी लौकी और भात का प्रसाद बनाती हैं। इस प्रसाद को खाने के बाद ही छठ व्रत की शुरुआत होती है। ऐसा माना जाता है कि मन, वचन, पेट और आत्मा की शुद्धि के लिए छठ व्रतियों का पूरे परिवार के साथ कद्दू-भात खाने की परंपरा चली आ रही है। नहाय-खाय में बनने वाले भोजन में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता है। इस दिन लौकी की सब्जी, अरवा चावल, चने की दाल, आंवला की चटनी, पापड़, तिलौरी बनते हैं। जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि प्रसाद के रूप में इन चीजों का सेवन करने से शरीर स्वस्थ होता है, जिससे इस महा पर्व को करने की शक्ति और प्रेरणा मिलती है। नहाय-खाय के दिन बनाया गया खाना सबसे पहले व्रत रखने वाली महिला को दिया जाता है।
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परंपरा और मान्यता
छठ पूजा की शुरुआत पवित्रता और आत्मसंयम से होती है। कहा जाता है कि इस पर्व के दौरान सूर्य को अर्घ्य देने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भोपाल में इस बार भी श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।