विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार ने 'मध्य प्रदेश जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2025' सहित कुल चार विधेयक सदन में प्रस्तुत किए। इन विधेयक पर बुधवार को चर्चा का समय तय किया गया है। इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस विधेयक का उद्देश्य व्यापार में अनावश्यक कानूनी बाधाओं को दूर कर, प्रदेश में निवेश और उद्योग के लिए एक भरोसेमंद वातावरण तैयार करना है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक भारत सरकार के जन विश्वास अधिनियम, 2023 की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिससे छोटे स्तर के नियम उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर सरल प्रक्रिया के तहत निपटाया जा सकेगा। इससे व्यवसायियों को राहत मिलेगी और अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं से मुक्ति मिलेगी। डॉ. यादव ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक के तहत 12 विभागों के 20 अधिनियमों में कुल 44 उपबंधों में संशोधन किया गया है। यह पहल प्रदेश में उद्योग और व्यापार की सुगमता को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 18 महीनों में हमने उद्योगों को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी है और सभी लंबित बकाया भुगतान किए जा चुके हैं। राज्य सरकार ने रिकॉर्ड समय में 18 नई निवेश नीतियां लागू की हैं, जिससे मध्य प्रदेश निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है।
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ये विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए गए
विधानसभा में मध्य प्रदेश माध्यमस्थ अधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2025, मध्य प्रदेश मोटरयान कराधान संशोधन विधेयक 2025 और कमजोर वर्गों के लिए विधिक सहायता तथा विधिक सलाह (निरसन) विधेयक, 2025 भी प्रस्तुत किए गए। राज्य सरकार का कहना है कि यह सभी विधेयक प्रदेश की नीतिगत पारदर्शिता और प्रशासनिक सरलता को और बेहतर बनाएंगे। उद्योगों और आम नागरिकों को अब कई प्रक्रियाओं में राहत मिलेगी और कामकाज में तेजी आएगी।