स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय में सीएम राइस स्कूल, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट, क्लिकर बेस्ड अससेमेंट सिस्टम, सुपर-100 की कोचिंग देने आदि के टेंडरों में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। अफसरों ने सबसे पहले बोस्टन कंसटेंसी ग्रुप कंपनी को 30 करोड़ रुपए का काम दे दिया, जिसमें विभाग के ही अफसरों के चहेतों को नौकरी दी गई। वहीं, अलग-अलग टेंडरों के जरिए भी कंपनियों को जो काम दिए जा रहे हैं, उनमें कंपनियों से मिलीभगत की जा रही है। लोक शिक्षण विभाग के टेंडरों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर ईओडब्ल्यू में पांच शिकायतें हुई हैं। इनमें से एक पर ईओडब्ल्यू ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।
जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय के अफसरों और बोस्टन कंसल्टेंसी ग्रुप और अन्य चहेती कंपिनयों के साथ अधिकारियों की मिली भगत से टेंडर की शर्तें पूरी नहीं करने पर भी काम दे दिया गया। ईओडब्लयू को की गई शिकायत में बताया जा रहा है कि सीएम राइस स्कूल समेत विभाग के अन्य फ्लेगशिप प्रोजेक्ट के टेंडरों में ऐसी 7 कंपनियां हैं, जिन्हें नियम को ताक पर रख काम दिया गया और कुछ को देने की तैयारी चल रही है।
इन कंपनियों पर लगे हैं गंभीर आरोप
बोस्टन कंसलटेंसी ग्रुप समेत विनसिस आईटी सर्विसेस प्रालि, हिटाजी एमजीआरएम नेट लि, ऑस्टर सिस्टम्स प्रालि यूनिकॉप्स टेक्नोलॉजी प्रालि इन्नोवेटिव इंडिया प्रालि, अपेंटस टेक्नोलॉजी प्रालि और नोटबुक नेटवर्क प्रालि कंपनियों के साथ अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप है। शिकायत में इन कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में यह हैं आरोप
1. स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव, निशिकांत जोशी, पंकज मोहन, राजेश मौर्य, डीएस कुशवाह, रोहिणी प्रसाद, राजेश बागड़े, एवं के.के.द्विवेदी द्वारा कंपनियों से मिलीभगत करके टेंडरों में भ्रष्टाचार कर चहेती कंपनियों को फायदा पहुँचाया जा रहा है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के कर्मचारियों द्वारा डाटामेटिक्स बिजनेस सॉल्यूशन लि से साँठ-गाँठ कर नियमविरुद्ध क्लिकर बेस्ड अससेमेंट सिस्टम का काम दिया गया। इससे शासन को करोड़ों रुपये की क्षति पहुचांयी गयी।
- एलेन कैरियर इंस्टिट्यूट को बिना टेंडर के ही सुपर-100 योजना का काम दे दिया। इससे भी पारदर्शिता नहीं रही और भ्रष्टाचार किया गया। ऐलन कोचिंग से अधिकारियों ने मोटी रकम वसूली।
- सीएम राइस स्कूल के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के टेंडर में भी इन अधिकारियों ने कंपनियों के साथ मिलीभगत कर भ्रष्टाचार किया। टेंडर में ऐसी शर्तें लिखी जाती हैं जो अन्य संस्थाओं द्वारा पूरी न की जा सकती हों।