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MP News: सीएम बोले- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, राज्य के कौशल, नवाचार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का है आधार

Sun, 07 Dec 2025 09:47 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन और उससे जुड़ी चुनौतियों पर भोपाल में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने शिक्षा में बदलाव और नई दिशा की जरूरत पर जोर दिया।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 पर कार्यशाला में शामिल अतिथि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, चुनौतियों और संभावनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित की गई, जिसमें राज्यपाल मंगुभाई पटेल मुख्य अतिथि एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति राज्य के कौशल, नवाचार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आधार है। यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। प्रदेश में एनईपी को केवल शिक्षा सुधार के रूप में नहीं, बल्कि कौशल विकास, नवाचार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण से जोड़ा गया है। विश्वविद्यालयों में कुलपतियों को ‘कुलगुरु’ संबोधित किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में गुरुकुल परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 370 सांदीपनि स्कूल स्थापित किए गए हैं, जो 21वीं सदी के कौशल और गुरुकुल संस्कृति का संगम प्रस्तुत करते हैं। मुख्यमंत्री ने इंदौर और रतलाम के सांदीपनि विद्यालयों को मिली वैश्विक सराहना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समेकित विश्वविद्यालयों की अवधारणा से विद्यार्थियों को सभी विषयों के अध्ययन की सुविधा एक ही परिसर में मिल सकेगी।
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राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के भविष्य को नई दिशा देने वाली दूरदर्शी कार्ययोजना है, जिसकी मूल भावना समग्रता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को शिक्षा-परिवर्तन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों को नवाचार, डिजिटल अवसंरचना और उद्योग-शिक्षा सहभागिता को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने मातृभाषा में अनुभवात्मक शिक्षण, शिक्षक-प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि 21वीं सदी के कौशल-एआई, डिजिटल साक्षरता और सेल्फ-लर्निंग को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने गुजरात की ‘दूध संजीवनी’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों के पोषण और विद्यालय उपस्थिति में अभिभावकों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नीति का क्रियान्वयन प्रशासनिक कदम भर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रयास है। 
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का उद्देश्य मकाले-कालीन शिक्षा व्यवस्था में भारतीय मूल्यों और भारतीयता का पुनर्संचार करना है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत की पारंपरिक शिक्षा प्रणालियों को आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जोड़ा जाए, ताकि दुनिया भारत की समृद्ध संस्कृति और ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर पहचान सके। प्रधान ने कहा कि मध्यप्रदेश वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक शिक्षा का प्राचीन केंद्र रहा है।  प्रधान ने कहा, “एनईपी का उद्देश्य मकाले-प्रभावित शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता का संचार करना है।  उन्होंने नौकरी उन्मुख और नवाचार आधारित शिक्षा को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने संस्कृति, आस्था और ज्ञान परंपराओं की निरंतरता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई जैसे न्यू-एज स्किल्स के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधान ने छात्रों को कक्षा 12 तक शिक्षा से जोड़े रखने, स्थानीय  जरूरतों से शोध को जोड़ने, शैक्षिक संस्थानों में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और संस्थानों को समाज के प्रति उत्तरदायी बनाने की जरूरत बताई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश के डेढ़ करोड़ विद्यार्थियों में से 50 लाख बच्चों ने पांचवी क्लास तक एपल नहीं देखे होंगे। देखे होंगे तो बाजार में देखे होंगे, उन्हें सेब खाने का सौभाग्य नहीं है। कई बच्चों को एक गिलास दूध चाहिए तब नहीं मिलता? यह समाज को सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुलदस्ते की जगह इतने पैसों में दो किलो सेब आ जाते है। इस तरह की शुरुआत गुजरात में हुई थी, यही जनआंदोलन है। उन्होंने फलों की टोकरी से स्वागत की परंपरा अपनाने का सुझाव देते हुए पौष्टिकता और सादगी को बढ़ावा देने की बात कही।
 

स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश में दोहरी परीक्षा पद्धति लागू की गई है और 10वीं-12वीं के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने और निजी स्कूलों में किफायती पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश में एनईपी का क्रियान्वयन भारतीय ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखकर किया जा रहा है। अंकसूची व उपाधियों को डिज़ी-लॉकर में उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई है तथा कृषि विरासत और जनजातीय ज्ञान के अध्ययन पर भी कार्य हो रहा है।
 
 
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