मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत सात सांसदों और राष्ट्रीय महासचिव को उम्मीदवार बनाकर सबको चौंका दिया है। अब तक पार्टी ने 79 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इनमें से सिर्फ तीन सीटों पर ही भाजपा जीती थी। शेष पर उसे हार ही मिली थी। अब भाजपा की चौथी सूची का इंतजार है, जिसमें मौजूदा विधायकों के नामों पर फैसला होगा। भाजपा 40 प्रतिशत से अधिक मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है।
सिंधिया समर्थकों को हो सकती है निराशा
पार्टी ने टिकट के लिए जो फेक्टर तय किए हैं, उन पर खरा उतरना जरूरी है। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस से आए नेताओं पर भी परखा जा रहा है। ऐसे विधायकों के टिकट कट सकते हैं, जो सिंधिया के साथ भाजपा में आए जरूर, लेकिन अपने आप को भाजपा के अनुरूप ढाल नहीं सके। संगठन से उनका सामंजस्य है या नहीं, यह भी एक अहम पहलू है। सिंधिया के साथ भाजपा में आए कुछ विधायक अब भी भाजपा की रीति-नीति में रच-बस नहीं सके हैं। इस आधार पर उनके टिकटों पर तलवार लटक रही है। संगठन से टकराहट होने पर नेताओं को टिकट से इनकार किया जाएगा।
पहली दो लिस्ट से मिले हैं संकेत
भारतीय जनता पार्टी 2018 की गलती नहीं दोहराना चाहती है। चुनाव प्रचार से लेकर प्रत्याशी के चयन में भी चौंका रही है। पार्टी ने अब तक 79 प्रत्याशियों की सूची जारी की है। तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत सात सांसद और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को टिकट दिया है। इनमें 76 सीटों पर भाजपा को हार मिली थी। इस वजह से केंद्रीय नेताओं के जरिये न केवल उन सीटों को कांग्रेस से छीनने की तैयारी है बल्कि आसपास के जिलों में भी उनका प्रभाव हो सकता है।
भाजपा 2018 में 109 सीट पर जीती थी
2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 109 और कांग्रेस ने 114 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा की सीट बढ़कर 127 पहुंच गई थी।