भोपाल के आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने गंभीर कार्रवाई करते हुए एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। यह दंड कॉलेज द्वारा एमबीबीएस इंटर्न और पीजी रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड भुगतान की जानकारी छुपाने और नियमों का उल्लंघन करने के कारण लगाया गया है। एनएमसी ने कॉलेज को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि स्टाइपेंड की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए, ताकि छात्रों को उनके अधिकारों का सही लाभ मिल सके।
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नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई
आयोग के अनुसार, आरकेडीएफ कॉलेज ने कई बार चेतावनी मिलने के बाद भी नियमों का पालन नहीं किया और छात्रों के हक को दबाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद भुगतान संबंधी पारदर्शिता नहीं दिखाई गई, जो गंभीर प्रशासनिक अपराध माना गया। एनएमसी ने यह कार्रवाई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की है और कॉलेज को अंतिम चेतावनी दी है।
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आरकेडीएफ के साथ छह अन्य कॉलेजों पर जुर्माना
एनएमसी ने केवल आरकेडीएफ पर ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि देशभर के छह अन्य मेडिकल कॉलेजों पर भी इसी कारण एक-एक करोड़ का जुर्माना लगाया है। इन संस्थानों में आकाश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (बैंगलोर), दुमका मेडिकल कॉलेज (झारखंड), राजकीय मेडिकल कॉलेज बाड़मेर (राजस्थान), राजकीय मेडिकल कॉलेज ओंगोल (आंध्र प्रदेश), प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (लखनऊ), और पंडित बी.डी. शर्मा पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट (रोहतक) शामिल हैं।
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स्टाइपेंड भुगतान की जानकारी वेबसाइट पर साझा करें
एनएमसी ने कहा कि अब इन सभी कॉलेजों को स्टाइपेंड भुगतान की पूरी जानकारी अपनी वेबसाइट पर साझा करनी होगी। आयोग का कहना है कि छात्रों के मेहनत और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना हर संस्थान की कानूनी जिम्मेदारी है।
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