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MP News: भोपाल ननि की करोड़ों की जमीन को निजी बता बेच दिया, कॉलोनाइजर कंपनी के निदेशक समेत पांच पर केस दर्ज

Thu, 13 Aug 2026 06:35 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल की पटेल नगर कॉलोनी में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन को बेचने के मामले में ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में स्कूल की जमीन और एक बुजुर्ग महिला के प्लॉट में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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ईओडब्ल्यू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने राजधानी की पटेल नगर कॉलोनी में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन को बेचने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू ने कॉलोनाइजर कंपनी मेसर्स गंधर्व लैंड एंड फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि स्कूल के लिए आरक्षित नगर निगम की जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेच दिया गया। इसके अलावा एक बुजुर्ग महिला के प्लॉट को लेकर फर्जी दावेदार खड़े कर उसे भी दूसरे लोगों को बेच दिया गया। ईओडब्ल्यू ने कंपनी के निदेशक अनुज ग्रोवर के अलावा जय प्रताप सिंह यादव, अभिषेक आनंद, मनीष नायक और प्रेमानंद नायक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।  
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90 एकड़ में विकसित की गई थी कॉलोनी
जांच के अनुसार, पटेल नगर कॉलोनी रायसेन रोड स्थित हथाईखेड़ा और खजूरी खुर्द क्षेत्र में लगभग 90 एकड़ जमीन पर विकसित की गई थी। कॉलोनी के स्वीकृत नक्शे में स्कूल, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए अलग से जमीन आरक्षित की गई थी। ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि यह जमीन शुरू से ही नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में थी और कॉलोनाइजर कंपनी को इस पर कभी मालिकाना हक नहीं मिला था। वर्ष 1962 के डायवर्जन आदेश और 1999 में नगर निगम के साथ हुए समझौते में भी इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया था। 
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स्कूल की जमीन 3.90 करोड़ रुपये में बेचने का आरोप
जांच में सामने आया कि कंपनी के निदेशक अनुज ग्रोवर ने पूरी जानकारी होने के बावजूद स्कूल के लिए आरक्षित 1.212 एकड़ जमीन को अपनी संपत्ति बताकर 27 नवंबर 2024 को जय प्रताप सिंह यादव और अभिषेक आनंद को 3.90 करोड़ रुपये में बेच दिया। ईओडब्ल्यू के अनुसार, यह जमीन बच्चों की शिक्षा और कॉलोनी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आरक्षित की गई थी। 

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बुजुर्ग महिला के प्लॉट में भी किया गया फर्जीवाड़ा
जांच के दौरान एक और मामला सामने आया। एक महिला ने वर्ष 1978 में कॉलोनी के प्लॉट क्रमांक ई-12 के लिए पंजीकरण कराया था और पूरी राशि भी जमा कर दी थी। इसके बावजूद कंपनी ने वर्षों तक उनकी रजिस्ट्री नहीं की। बाद में महिला के परिवार ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने कंपनी को ब्याज सहित राशि लौटाने का आदेश दिया, लेकिन परिवार अपना प्लॉट चाहता था। ईओडब्ल्यू के मुताबिक, इसी दौरान कंपनी ने दो लोगों को फर्जी दावेदार बनाकर सिविल कोर्ट में विवाद खड़ा किया और बाद में समझौते के आधार पर उसी प्लॉट को मनीष नायक और प्रेमानंद नायक को 1.10 करोड़ रुपये में बेच दिया। 

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पानी के कुएं की जमीन भी बेची गई
जांच में यह भी सामने आया कि कॉलोनी में पानी की आपूर्ति के लिए बनाए गए तीन कुओं में से एक को पाटकर उसकी जमीन भी बेच दी गई। ईओडब्ल्यू ने पाया कि कॉलोनी में आज तक सड़क, सीवर, नाली और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं की गईं। इससे यहां रहने वाले लोग लंबे समय से परेशान हैं। 

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नगर निगम ने पहले ही जताई थी आपत्ति
मामले की जानकारी मिलने के बाद नगर निगम भोपाल ने सार्वजनिक सूचना जारी कर इस जमीन की बिक्री पर आपत्ति दर्ज कराई थी। शासन स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में भी कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। जांच में दोनों मामलों को मिलाकर करीब पांच करोड़ रुपये की सरकारी और आरक्षित संपत्ति की अवैध बिक्री के तथ्य सामने आए। ईओडब्ल्यू ने मामले में अपराध दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
 
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