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भोपाल लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: उदयपुरा नगर परिषद के उपयंत्री दो लाख की रिश्वत लेते पकड़े गए, निलंबित

Tue, 28 Apr 2026 09:24 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल लोकायुक्त ने रायसेन जिले की उदयपुरा नगर परिषद में पदस्थ उपयंत्री को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। मामले में सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी की भूमिका भी सामने आई है।  उदयपुरा नगर परिषद में पदस्थ उपयंत्री  दीपांशु पटेरिया को जानकारी मिलने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने निलंबित भी कर दिया। 
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उदयपुरा नगर परिषद के उपयंत्री दीपांशु पटेरिया रिश्वत लेते गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल लोकायुक्त की टीम ने मंगलवार को बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए रायसेन जिले की उदयपुरा नगर परिषद में पदस्थ उपयंत्री दीपांशु पटेरिया को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इस मामले में नगर परिषद के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी शंकर साहू को भी आरोपी बनाया गया है। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता जयंत चतुर्वेदी कोलार रोड स्थित गुड शेफर्ड कॉलोनी के निवासी हैं और ‘नवीन बिल्डकॉम’ फर्म का संचालन करते हैं। उनकी फर्म ने उदयपुरा नगर परिषद क्षेत्र में बस स्टैंड का सीसी निर्माण और मेन रोड पर सीसी रोड निर्माण कार्य किया था। निर्माण कार्य से जुड़ी दो सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि जारी करने और अनुभव प्रमाण पत्र देने के बदले उपयंत्री दीपांशु पटेरिया और सहायक ग्रेड-2 शंकर साहू द्वारा कथित रूप से 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।
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इसकी शिकायत जयंत चतुर्वेदी ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल से की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की। मंगलवार को दीपांशु पटेरिया भोपाल में स्वच्छता अभियान के तहत आयोजित लोकल सेल्फ गवर्नेंस की कार्यशाला में शामिल होने आए थे। कार्यशाला खत्म होने के बाद लोकायुक्त टीम ने उन्हें शिवाजी नगर, भोपाल में करीब 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। 
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प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, संबंधित निर्माण कार्य की कुल लागत करीब 1.13 करोड़ रुपये थी, जिसमें से लगभग 72 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका था। शेष अंतिम भुगतान जारी करने के बदले उपयंत्री द्वारा 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने तुरंत सख्त रुख अपनाते हुए उपयंत्री दीपांशु पटेरिया को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। वहीं, लोकायुक्त की इस ट्रैप कार्रवाई के बाद नगरीय निकायों में भी हड़कंप मच गया है।
 
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