मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम के आठ दिन बाद मुख्यमंत्री के नाम का सस्पेंस खत्म हो गया है। भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद मोहन यादव को सीएम बनाने की घोषणा की गई। यादव आरएसएस की पसंद है। तीन बार के विधायक और उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। दिग्गज नेताओं के विधानसभा चुनाव लड़ने के बावजूद मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में क्यों गस गए? जाने पांच वजह।
आरएसएस की पसंद- मोहन यादव आरएसएस के करीबी है। उन्होंने राजनीतिक की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की और अलग-अलग पदों पर रहे। आरएसएस की पसंद का लाभ मिला।
नई लीडरशिप को मौका- भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश में नई लीडरशिप तैयार करने का संदेश दिया है। दिग्गज नामों के बीच 58 साल के मोहन यादव को सीएम बनाकर भाजपा नेतृत्व ने बता दिया कि वह प्रदेश में दूसरी लाइन तैयार कर रहे हैं।
ओबीसी चेहरा- भाजपा ने आदिवासी बाहुल्य छत्तीसगए़ की तर्ज पर मध्य प्रदेश में ओबीसी के चेहरे को आगे बढ़ाया। प्रदेश में ओबीसी वर्ग की संख्या 50 प्रतिशत के करबी है। सीएम शिवराज भी ओबीसी से आते है। ओबीसी से ओबीसी को रिप्लेस किया।
यूपी-बिहार को संदेश- मध्य प्रदेश में यादव कार्ड खेल कर उत्तर प्रदेश और बिहार को साधने का प्रयास। अगले साल लोकसभा चुनाव है। दोनों राज्यों में 120 लोकसभा सीटें है। दोनों ही राज्यों में यादवों का खासा प्रभाव है। पूरे देश में करीब 12 करोड़ यादव वोटर है।
लो प्रोफाइल- मोहन यादव को लो प्रोफाइल और अनुभव का भी फायदा मिला। यादव तीन बार के विधायक और पिछली सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री थे। नए चेहरे के बावजूद सरकार चलाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। पार्टी ने एक कार्यकर्ता के रूप में बड़ा इनाम दिया।