मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को संगठन की ताकत दिखाने के अवसर के रूप में लेने का फैसला किया है। सोमवार को भोपाल में होने वाले नामांकन कार्यक्रम के लिए पार्टी ने सभी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को राजधानी में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से जारी कार्यक्रम के अनुसार मीनाक्षी नटराजन सोमवार सुबह 11 बजे इंदिरा भवन स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से विधानसभा के लिए रवाना होंगी और वहां राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करेंगी।
कांग्रेस के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद
नामांकन कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और विधायक शामिल होंगे।
नामांकन से पहले कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
पार्टी की रणनीति के तहत सुबह कांग्रेस मुख्यालय में विधायक और वरिष्ठ नेता एकत्र होंगे। इसके बाद सभी नेता सामूहिक रूप से विधानसभा पहुंचेंगे, जहां मीनाक्षी नटराजन राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगी। कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए अपने संगठन की एकजुटता का संदेश देने की तैयारी में है।
विधायकों की मौजूदगी पर विशेष जोर
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सभी कांग्रेस विधायकों को तय समय पर भोपाल पहुंचने के लिए कहा गया है। राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं और संभावित सियासी समीकरणों के बीच कांग्रेस किसी तरह का गलत संदेश नहीं जाने देना चाहती। यही वजह है कि नामांकन कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
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उम्मीदवार चयन के बाद उठे थे सवाल
कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने अलग-अलग राय भी सामने रखी थी। कई नेताओं का मानना था कि किसी अनुभवी राज्यसभा सदस्य को दोबारा मौका दिया जाना चाहिए था। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अंततः मीनाक्षी के नाम पर सहमति जताई और अब पूरा संगठन उनके समर्थन में सक्रिय दिखाई दे रहा है।
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तीसरी सीट को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
राज्यसभा चुनाव की तीन सीटों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने विधायकों को साधने में जुटी हैं। भाजपा ने भी अपने विधायकों को भोपाल में रहने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में चुनावी गणित भले ही स्पष्ट दिखाई दे रहा हो, लेकिन तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं।