मध्य प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी अभियान में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। 20 जुलाई से 10 अगस्त तक लिए गए 2234 नमूनों में 73 जांच में फेल पाए गए। इनमें घी के नमूनों की रिपोर्ट ने सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाई है। भोपाल के 13 और इंदौर के 8 घी के नमूने असुरक्षित पाए गए।
भोपाल के इन घी नमूनों पर सवाल
भोपाल में द्वारकेश, शगुन, गोवर्धन, दानेदार, भूमि, धोलपुर फ्रेश और भूमि प्रीमियम प्योर के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा डिंडौरी के वास्तु और गोपी श्री, इंदौर के श्री सुधा प्रीमियम, गुमार प्योर, शुद्ध घी और वास्तु एगमार्क देशी घी सहित अन्य जिलों के नमूने भी असुरक्षित मिले।
44 हजार किलो से ज्यादा सामग्री जांच के घेरे में
अभियान के दौरान विभाग ने 44 हजार 407 किलो सामग्री जब्त की, जिसकी कीमत करीब 2.73 करोड़ रुपए बताई गई है। लिए गए 2234 नमूनों में 849 दूध, 106 मावा, 296 पनीर, 601 घी और 382 अन्य दुग्ध उत्पादों के नमूने शामिल हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद 8 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 38 मामले दर्ज किए गए, जबकि एक मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई।
लापरवाही पर 3 खाद्य सुरक्षा अधिकारी निलंबित
प्रदेशव्यापी अभियान की समीक्षा के दौरान काम में लापरवाही मिलने पर खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने मुरैना के अवनीश गुप्ता, सागर की प्रीति राय और पन्ना के राजेश राय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके अलावा अलग-अलग जिलों के 42 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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मिलावट के खिलाफ अभियान जारी
खाद्य सुरक्षा प्रशासन का अभियान दूध, घी, मावा, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की जांच पर केंद्रित है। बड़ी संख्या में नमूने लिए जाने और उनके फेल होने के बाद विभाग ने संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। अधिकारियों की लापरवाही पर भी कार्रवाई से साफ है कि अब केवल मिलावट करने वालों पर ही नहीं, बल्कि जांच और निगरानी में लापरवाही बरतने वालों पर भी कार्रवाई की जा रही है।