कांग्रेस नेता कमलनाथ (फाइल फोटो)
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मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह तीन नए कृषि कानूनों को लागू कर कृषि क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है। गुरुवार को भोपाल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कमलनाथ ने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसकी राजनैतिक शाखा भाजपा सदैव से पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की हिमायती रहे हैं जबकि कांग्रेस पार्टी सदैव से ही समाजवादी अर्थव्यवस्था व विचारधारा की समर्थक रही है।
बोले-भाजपा व संघ ने किया था राष्ट्रीयकरण का विरोध
कमलनाथ ने यह भी दावा किया कि भाजपा एवं आरएसएस ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा किए गए बैंकों और कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण का भी विरोध किया था। केन्द्र सरकार तीन कृषि कानूनों के साथ कृषि क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है। मध्य प्रदेश के किसान सरल हैं और तीनों नए कानून उनके हितों के खिलाफ हैं।
मालूम हो कि दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पिछले 40 दिनों से ज्यादा समय से हजारों किसान और अन्य लोग डेरा डाले हुए हैं। ये सरकार से तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने और उपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।
किसानों के समर्थन में 15 जनवरी को चक्काजाम
कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश भर की तहसीलों और जिलों सहित विभिन्न स्थानों पर किसानों के समर्थन में और सरकार के खिलाफ हमारा विरोध प्रदर्शन 23 जनवरी तक जारी रहेगा। 15 जनवरी को कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश में किसानों के साथ दोपहर 12 बजे से दो घंटे तक का चक्का जाम आंदोलन करेंगे। इसके अलावा प्रदेश के मुरैना में 20 जनवरी को विशाल किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी। तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसानों के साथ उनकी पार्टी 23 जनवरी को राजभवन का घेराव करेगी।
मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि वह स्वयं 16 जनवरी को छिंदवाड़ा जिले में किसान जागरण के तहत किसान सम्मेलन में शामिल होंगे। प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर इस तरह के किसान सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।