पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और पूर्व सीएम कमलनाथ
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लोकसभा चुनावों के एग्जिट पोल्स में मध्य प्रदेश के राजगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह और छिंदवाड़ा के प्रत्याशी नकुल नाथ को लेकर भी दावे किए गए हैं। इससे सवाल खड़े हो गए हैं कि लोकसभा चुनावों के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की प्रदेश की सियासत में भूमिका क्या रहेगी? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि दिग्विजय सिंह हारते हैं तो यह उनकी राजनीति पर पूर्ण विराम होगा। यदि जीते तो केंद्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे। इसी तरह यदि नकुलनाथ को हार मिलती है तो कमलनाथ का कद केंद्रीय स्तर पर भी घट जाएगा। यदि नकुलनाथ जीते तो भी कमलनाथ की सक्रियता कम ही हो जाएगी। भविष्य में उन्हें राज्यसभा से दिल्ली भेजा जा सकता है।
एग्जिट पोल में ज्यादातर एजेंसियों ने प्रदेश की 29 सीटों में से 28 से 29 सीटों पर भाजपा के जीतने का अनुमान लगाया है। यदि नतीजे एग्जिट पोल के अनुसार आते हैं तो प्रदेश कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर संशय के बादल मंडरा सकते हैं। एग्जिट पोल में प्रदेश में भाजपा को बढ़त में दिखाया गया है। प्रदेश में लोगों की दिलचस्पी राजगढ़ और छिंदवाड़ा की सीट के नतीजों को लेकर है। राजगढ़ सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कांग्रेस प्रत्याशी हैं। उनका सामना दो बार के भाजपा सांसद रोडमल नागर से है, जो नरेंद्र मोदी के चेहरे पर भरोसा कर रहे हैं। करीब 33 साल बाद दिग्विजय सिंह राजगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़े हैं। उन्होंने चुनाव में जनता से सीधा जुड़ाव बनाने के लिए पैदल यात्रा निकाली। चुनाव के दौरान उनका कोई भी विवादित बयान सामने नहीं आया। उन्होंने सिर्फ अपने समय किए कामों को गिनाया और नागर के खिलाफ जनता में नाराजगी को मुद्दा बनाया। उन्होंने इस चुनाव को आखिरी चुनाव बताते हुए जनता से वोट देने की भावनात्मक अपील की। राजगढ़ में पिछली बार से 1.65 प्रतिशत अधिक वोटिंग हुई है। एग्जिट पोल ने प्रदेश में कांग्रेस को सिर्फ एक सीट जीतने की संभावना बताई है, तो वह सीट राजगढ़ होगी या छिंदवाड़ा, यह सभी के लिए एक सवाल बना हुआ है।
2019 में प्रदेश में 29 में 28 सीटें भाजपा जीती थी। छिंदवाड़ा सीट कांग्रेस के पास ही रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ चुनाव इस सीट पर चुनाव जीते थे। इस बार भी नकुलनाथ चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने विवेक बंटी साहू को मैदान में उतारा है। चुनाव से ठीक पहले कमलनाथ के करीबी अमरवाड़ा से विधायक कमलेश शाह, महापौर विक्रम अहाके और पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना भाजपा में शामिल हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई दिग्गज नेताओं ने छिंदवाड़ा में रैली और जनसभा की। दूसरी तरफ कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में अकेले ही मोर्चा संभाला। उन्होंने छिंदवाड़ा की जनता से अपने 45 साल के संबंध बताकर वोट देने की भावनात्मक अपील के साथ लगातार जनसंपर्क किया। इस सीट पर 1980 में कमलनाथ पहली बार सांसद बने थे। 1997 के उप-चुनाव को छोड़ दे तो यह सीट नाथ परिवार के पास ही रही। 1997 में इस सीट पर भाजपा के सुंदर लाल पटवा ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में यदि छिंदवाड़ा सीट पर भाजपा को जीत मिलती है तो इसे भाजपा की तोड़फोड़ की राजनीति को सफल माना जाएगा। ऐसे में जानकारों का कहना है कि यदि राजगढ़ और छिंदवाड़ा सीटें कांग्रेस हारती है तो यह हार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की मानी जाएगी। इसी वजह से इसे उनके राजनीतिक भविष्य की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।