मध्यप्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती शराबबंदी की अपनी मुहिम को आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ा रही हैं। नई आबकारी नीति 31 जनवरी तक आनी थी, लेकिन अब तक नहीं आई है। सरकार भी उमा भारती के रुख को देखकर सधे हुए कदमों से आगे बढ़ रही है।
एक दिन पहले आबकारी नीति अटकने की वजह होने से इनकार करने वाली उमा भारती ने रविवार को भी जमकर हमले बोले। इस बार उनके निशाने पर शराब माफिया था और उसका डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट। उन्होंने कहा कि मैं व्यग्रता से नई शराब (आबकारी) नीति की प्रतीक्षा कर रही हूं। तब तक डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट मेरे ऊपर खूब पत्थरबाज़ी करवा रहा है ताकि बात की धार कम की जा सके। मैं तो मध्यप्रदेश को शराब में बहने से बचाने के लिए कुछ भी झेल लूंगी। शराब माफिया कितना ताकतवर है, इसका अंदाज लगाते रहिए।
राजस्व हानि की भरपाई के दिए सुझाव
उमा भारती ने कहा कि मेरे दिए संशोधनों (परामर्श) से बहुत कम राजस्व की हानि होगी, तो उसकी जगह शराब पीने के दुष्परिणाम हिंसा, हत्या, झगड़ा, छेड़खानी, दुष्कर्म जरा इनके बारे में सोचिए। शराब वितरण के नियंत्रण से पूरे राजस्व की हानि की कई गुना ज्यादा वसूली हो सकती है। मध्यप्रदेश रेतीली नदियों का राज्य है। वैज्ञानिक तरीके से किए गए रेत खनन को वैध कर दीजिए और कठोरता से अवैध रेत खनन को रोकने की हिम्मत जुटाइये।
नई शराब नीति शिवराज की बड़ी परीक्षा
उमा भारती ने कहा कि आपको याद होगा कि लगभग दो साल पहले मैंने शिवराज जी की निजी जीवन की अच्छाइयों का वर्णन करते हुए एक लेख लिखा था। मैं आज भी उस पर कायम हूं। आश्चर्य यही है कि शिवराज जी अपने निजी जीवन की अच्छाइयों को अपनी योजनाओं द्वारा धरातल पर क्यों नहीं ला पा रहे हैं। शीघ्र ही घोषित होने वाली नई शराब नीति शिवराज जी की सबसे बड़ी परीक्षा है।
नई नीति में बंद हो सकते हैं अहाते
मध्यप्रदेश सरकार की आबकारी नीति पर उमा भारती का असर साफ दिख रहा है। नीति के मसौदे को लेकर जो खबरें आई हैं, उनके मुताबिक अहाते बंद हो सकते हैं। अगर चलते हैं तो समय शाम पांच से रात 11 बजे तक ही खुले रहेंगे। देसी शराब के दाम एक से दो रुपये बढ़ सकते हैं। पिछले साल 23 जनवरी को शराब नीति आ गई थी, लेकिन इस साल उमा भारती के रुख की वजह से 12 फरवरी तक भी नीति नहीं आई है। शराब दुकानों को धार्मिक स्थलों और स्कूलों के 500 मीटर के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है, जिसका असर करीब डेढ़ हजार दुकानों पर पड़ेगा। ड्राफ्ट के मुताबिक लाइसेंस फीस 10 प्रतिशत बढ़ाकर ठेका रिन्यू करने का प्रस्ताव है। नई शराब नीति एक अप्रैल 2023 से लागू होगी।
बागेश्वर धाम एक तपस्वी हैं, अलौकिक हैं
पूर्व सीएम उमाभारती ने ट्वीट कर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर भी विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने लिखा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम) को मैं पुत्रवत मानती हूं, उनका आदर करती हूं एवं वे हमारे क्षेत्र के गौरव हैं। उनकी महिमा की अनुभूति स्वयं मुझे आज एक प्रसंग में हुई।
उमा ने आगे लिखा कि अगर 31 जनवरी को शराब नीति सरकार ने घोषित कर दी होती तो 21 फरवरी को या तो विरोध या समर्थन के लिए हमने जंबूरी मैदान भोपाल में रैली बुलाने का फैसला किया हुआ था। शराब नीति की घोषणा में हुई देरी ने हमें प्रोग्राम का स्थान बदलने को विवश कर दिया। जब मेरी पसंद पूछी गई तो मैंने फिर दुर्गा हनुमान मंदिर, अयोध्या बायपास,भोपाल का ही नाम लिया, क्योंकि 21 फरवरी को मेरी मां का स्मृति दिवस है तो हमें प्रोग्राम करना ही था। जब मैंने, जिस स्थान पर मैं 4 दिन रही उस समय की अनुभूति का वर्णन किया, जिस जगह पर मेरी कॉटेज बनी उस जगह पर अलौकिक आनंद की अनुभूति मुझे 4 दिन होती रही। जब मैंने अपने सहयोगियों से इसका जिक्र किया तब उन्होंने मुझे बताया कि पिछले वर्ष धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम जी की कथा, जब पीछे के मैदान में हुई थी तब उनकी कुटिया वहीं बनी थी, जहां मैं थी। वहां की अनुभूतियों की अलौकिकता ने मेरे मन के अंदर यह भाव स्थापित कर दिया कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम एक तपस्वी हैं, अलौकिक हैं। लोग उनके अधिक से अधिक जाकर दर्शन करें, यह मैंने हमेशा कहा। अब तो और जोर से यह बात कहूंगी।