भोपाल के रविन्द्र भवन में दो दिवसीय भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान का रविवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने यह मिथक तोड़ा है कि चिकित्सा और तकनीक जैसे विषयों की पढ़ाई हिंदी में नहीं हो सकती। राज्य ने विश्व को दिखा दिया कि हिंदी माध्यम से चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा पूरी तरह संभव है। परमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति ज्ञान आधारित है और इसके माध्यम से भारतीय दर्शन को बच्चों तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की जाएगी, ताकि विद्यार्थी न केवल भाषायी सौहार्द्र बढ़ाएँ बल्कि दूसरे प्रदेशों में जाकर भी कौशल विकसित कर सकें।
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भाषा केवल अभिव्यक्ति नहीं – पद्मश्री विष्णु पण्डया
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री विष्णु पण्डया ने कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि जुड़ने का सशक्त साधन है। उन्होंने मीराबाई के उदाहरण से बताया कि कैसे उनकी रचनाओं में विभिन्न भाषाओं के शब्द मिलते हैं, जो भाषाई समन्वय का प्रमाण है।
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“बोलियों की शक्ति से ही बनेंगे विश्वगुरु”
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार व वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि भारत की लगभग सात हजार भाषाएँ और बोलियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। इनकी शक्ति को पहचानकर ही भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है। वहीं संस्कृति संचालक एनपी नामदेव ने कहा कि सरकार हिंदी का महत्व विश्व स्तर पर स्थापित करने के प्रयास कर रही है। अनुष्ठान के पहले दिन कन्नड़, मलयालम, तमिल और बांग्ला भाषाओं के हिंदी से अंतरसंबंध पर विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि हिंदी और अन्य भाषाओं में कई शब्द समान हैं और अनुवाद इन्हें जोड़ने का सेतु बन सकता है। दूसरे सत्र में भारतीय भाषा एवं प्रौद्योगिकी पर चर्चा हुई। टैगोर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संतोष चौबे ने कहा कि विज्ञान और तकनीक, भाषा की सहयोगी हैं। अभिनेता राजीव वर्मा ने नाटक और सिनेमा की भाषा पर विचार रखे, जबकि कला समीक्षक विनय उपाध्याय और लोककला मर्मज्ञ डॉ. धर्मेन्द्र पारे ने नृत्य, संगीत और जनजातीय भाषाओं पर अपने वक्तव्य दिए।
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प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम स्थल पर “भारतीय भाषा आलोक”, “कलम के सिपाही” और “सदी साक्षी है” शीर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गईं, जिन्होंने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर डॉ. सूर्यप्रकाश दीक्षित और पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने भी विचार रखे। श्रीधर ने कहा कि “अपनी भाषा पर अभिमान, सभी भाषाओं का सम्मान है” इसी उद्घोष के साथ यह अनुष्ठान पूरे देश में आगे बढ़ेगा।
सीएम डॉ. यादव समापन समारोह में होगे शामिल
राष्ट्रीय हिन्दी अलंकरण सम्मान समारोह का सोमवार को शाम चार बजे रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देश के अग्रणी मनीषियों को राष्ट्रीय हिन्दी भाषा सम्मान अलंकरण से विभूषित करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी करेंगे। समारोह में विभिन्न प्रकाशनों का लोकार्पण और स्वदेशी जागरण अभियान “Be इंडियन, Buy इंडियन, हमारी-लक्ष्मी-हमारे पास” का शुभारंभ भी होगा।
मुख्यमंत्री को मिलेगा गोल्ड अवार्ड
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित विक्रमोत्सव 2025 को WOW अवार्ड एशिया की ओर से “एशिया के शासकीय समारोह” की विशेष श्रेणी में गोल्ड अवार्ड प्रदान किया गया है। यह सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को समारोह में भेंट किया जाएगा।
जिन प्रकाशनों का होगा लोकार्पण
भारतीय भाषा आलोक-राजेश्वर त्रिवेदी, समाज की भाषा का संकल्प -विजयदत्त श्रीधर, भोजपुरी प्रतिभाएं- डॉ. धर्मेन्द्र पारे, शिवगीता, दत्तात्रेयगीता, कपिलगीता, अवधूतगीता, भागवतगीता, यमगीता, हरिहरगीता, भृगुगीता, श्रीकृष्ण चरित्र- बंकिमचन्द्रम चट्टोपाध्याेय, श्रीराधा द्वापर युग की महानायिका-अशोक शार्मा व लोक में वेदांत- डॉ. सरोज गुप्ता।
अलंकृत होने वाले विभूतियां
राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान
2024 –प्रशांत पोळ, जबलपुर
2025 – लोकेन्द्र सिंह राजपूत, भोपाल
राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान
2024 – सुश्री रीता कौशल,ऑस्ट्रेलिया
2025 – डॉ. वंदना मुकेश, इंग्लैंड
राष्ट्रीय फादर कामिल बुल्के सम्मान
2024 – डॉ. इंदिरा गाजिएवा, रूस
2025 – पद्मा जोसेफिन वीरसिंघे, श्रीलंका
राष्ट्रीय गुणाकर मुले सम्मान
2024 – डॉ. राधेश्याम नापित, शहडोल
2025 – डॉ. सदानंद दामोदर सप्रे, भोपाल
राष्ट्रीय हिन्दी सेवा सम्मान
2024 – डॉ. के.सी. अजय कुमार, तिरुवनंतपुरम
2025 – डॉ. विनोद बब्बर, दिल्ली