पहले सांसद फिर विधायक बने हेमंत खंडेलवाल।
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पिता के निधन के बाद राजनीति में आए, पहला चुनाव जीते
जानकारी के अनुसार, हेमंत खंडेलवाल के सक्रिय राजनीतिक सफर की शुरुआत 2008 में हुई थी। दरअसल, पिता विजय कुमार खंडेलवाल के निधन से बैतूल लोकसभा सीट खाली हो गई। इस दौरान हुए उपचुनाव में भाजपा ने हेमंत खंडेलवाल को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा। हेमंत का सामना कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांस से था, जिन्हें हराकर वे लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद वे 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हेमंत वागद्रे को हराकर विधायक बने और 2018 तक बैतूल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 2018 के विस चुनाव में भाजपा ने उन्हें फिर से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस बार वे कांग्रेस के निलय डागा से चुनाव हार गए। पांच साल बाद 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर खंडेलवाल पर भरोसा जताया। इस दौरान उन्होंने निलय डागा को हराकर अपनी पारिवारिक सीट पर फिर से कब्जा कर लिया।
हेमंत खंडेलवाल बैतूल से विधायक हैं।
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सांसद, विधायक ही नहीं कोषाध्यक्ष भी रहे
हेमंत खंडेलवाल भाजपा की ओर से सांसद और विधायक रहने के साथ-साथ पार्टी में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वे मप्र भाजपा के कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। कुशाभाऊ ठाकरे विचार न्यास के अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा भी उन्होंने पार्टी और संगठन में कई जिम्मेदारियां संभाली है।
1990 में शादी हुई, दो बच्चों के पिता हैं खंडेलवाल
हेमंत खंडेलवाल नेता होने के साथ-साथ उद्योगपति और किसान भी हैं। उन्होंने बीकॉम और एलएलबी की डिग्री ले रखी है। उन्होंने 12 फरवरी 1990 में रितु खंडेलवाल से विवाह किया था। दोनों के दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और एक बेटी है। उनके पिता पूर्व सांसद विजय कुमार खंडेलवाल का निधन हो चुका है। मां कांति खंडेलवाल परिवार के साथ रहती हैं।
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