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किसान आंदोलन में हुंकार भर रही हरदा की 'नटखट' सानिका, बोली- मत छेड़ किसान को...

Thu, 07 Jan 2021 05:55 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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हरदा की सानिका पटेल - फोटो : सोशल मीडिया
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कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। ...लेकिन दिल्ली के सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर डटे किसानों के बीच मध्यप्रदेश के हरदा की सात साल की बच्ची सोशल मीडिया पर छा गई है। वह किसानों में नारों से जोश भर रही है और सरकार को चेता भी रही है। वह कह रही है, 'मत छेड़ किसान को लड़ना मुश्किल होगा, ऐसा लिखेंगे इतिहास कि पढ़ना मुश्किल होगा।'

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कौन है यह मासूम बच्ची?

दरअसल, हरदा की सानिका पटेल इस वक्त दिल्ली में डटी हुई है। वह अपने ओजस्वी भाषण और कविता पाठ से किसान आंदोलन की स्टार बन गई है। उसके भाषण सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं, जिन्हें कई जानी-मानी हस्तियां भी शेयर कर रही हैं।

पिता से सीखी खेती-किसानी

जानकारी के मुताबिक, सानिका जब चार साल की थी, तब से अपने पिता संजय खेरवा से कविता पाठ और भाषण देने के गुर सीख रही है। इसके अलावा वह खेती-किसानी के मामलों में भी अच्छी पकड़ रखती है। यही वजह है कि उसने अपनी बातों से दिल्ली में डंका बजा रखा है।

रुपहले पर्दे पर भी आ चुकी सानिका

गौरतलब है कि सानिका पटेल रुपहले पर्दे पर भी काम कर चुकी है। वह अभिनेत्री विद्या बालन की शॉर्ट फिल्म नटखट में नजर आई थी। उसने विद्या बालन के बेटे का किरदार निभाया था। इस फिल्म ने इंटरनेशनल किड्स फेस्टिवल में लाइव एक्शन का खिताब भी जीता था।

सोशल मीडिया पर भी हिट है सानिका

बता दें कि सानिका के चर्चे सिर्फ किसान आंदोलन से ही शुरू नहीं हुए। वह सोशल मीडिया पर काफी चर्चित है। दरअसल, फेसबुक पर सानिका का एक पेज है, जिसमें उसने खुद को कलाकार, मोटिवेशनल स्पीकर, समाजसेवी और किसानों के लिए समर्पित बताया है। यूट्यूब पर भी सानिका के वीडियो काफी पसंद किए जाते हैं।
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बड़ी-बड़ी बातें करती है छोटी-सी सानिका

किसान आंदोलन में मौजूद लोगों का कहना है कि सात साल की छोटी-सी सानिका काफी बड़ी-बड़ी बातें करती है। वह कहती है कि हमारी लड़ाई इन तीन काले कानूनों के साथ-साथ सत्ता, बिकाऊ मीडिया, गलत जानकारियों और भीषण सर्दी से भी है। एक भाषण में सानिका ने कहा था कि अच्छा हुआ मेरे पिता मुझे यहां ले आए। जब इतिहास लिखा जाएगा तो लहू में भीगे तमाम मौसम गवाही देंगे कि तुम खड़े थे, तुम खड़े थे... 
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