करीब 100 साल की उम्र पूरी करने जा रही हज कमेटी ऑफ इंडिया देश भर की शासकीय व्यवस्थाओं को धता दिखाती नजर आ रही है। आजादी के बाद से जहां देश के सभी सरकारी कार्यालयों के कार्यालय राजधानी दिल्ली में स्थित हैं। वहीं हज कमेटी ऑफ इंडिया का कार्यालय मुंबई में बसा हुआ है। हज मीटिंग्स और अन्य जरूरी कामों के निपटारे के लिए मंत्री से लेकर आला अधिकारियों के मुंबई दौड़ के हालात बदलने पर न कोई विचार किया जाता है और न ही बरसों पहले मुंबई में बनाए गए इस मुख्यालय की उस समय की स्थितियों पर कोई चर्चा की जाती है।
जानकारी के मुताबिक, हज कमेटी ऑफ इंडिया का गठन कमोबेश वर्ष 1927 में हुआ था। तत्कालीन मुस्लिम जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी वाली पहली हज कमेटी की औपचारिक बैठक 14 अप्रैल को हुई होना बताया जाता है। बताया जाता है कि इस पहली कमेटी में पहले अध्यक्ष मुंबई के तत्कालीन पुलिस आयुक्त डी हिली एस्क बनाए गए थे। मुंबई मुख्यालय पर हुई बैठक के बाद से यह क्रम अब करीब 97 बरस भी जारी है।
इसलिए बनाया था दिल्ली को मुख्यालय
सूत्रों का कहना है कि वर्ष 1927 में गठित हुई हज कमेटी ऑफ इंडिया का मुख्यालय मुंबई में बनाने की खास वजह थी। इस समय तक हाजियों की सऊदी अरब रवानगी पानी के जहाज से हुआ करती थी। देश के अन्य भागों के समुद्र तट से भी यह यात्रा होती थी, लेकिन मुंबई पोर्ट की विशालता और बड़े जहाजों की रवानगी के चलते मुंबई हज यात्रा का बड़ा सेंटर हुआ करता था। देश के अधिकांश हाजियों की रवानगी वाले इस शहर में ही हज कमेटी मुख्यालय भी इसी मंशा के साथ बनाया गया था, ताकि हज यात्रियों की कागजी खानापूर्ति आसानी से पूरी की जा सकें।
हवाई सफर को हुए 41 बरस
पानी के जहाज से हज सफर की विदाई होते हुए वर्ष 1983 से हवाई यात्रा के मार्फत सऊदी अरब पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। यह सफर मुंबई के साथ दिल्ली से भी शुरू हुआ था। इसके बाद बंगलौर (1986), चेन्नई (1987), कोलकाता (1998), कालीकट/कोचीन (2000) से भी हज के लिए हवाई सफर शुरू हो गया। इसके बाद इसका दायरा बढ़ते हुए अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, श्री नगर, नागपुर, गया/पटना, औरंगाबाद, वाराणसी, इंदौर, रांची, मंगलौर, भोपाल, गोवा, विजयवाड़ा आदि शहरों से भी हाजियों के लिए फ्लाइट की सुविधा शुरू हो गई है।
अब मजबूरी दिल्ली से मुंबई दौड़ की
मंत्रालय से विभागीय अधिकारियों तक की जमावट दिल्ली में है। जबकि हज कमेटी ऑफ इंडिया का मुख्यालय मुंबई में अब तक बसा हुआ है। हज ऑपरेशन से दसों तरह की नीतियों के निर्धारण के लिए साल में कई बार मीटिंगों का दौर जारी रहता है। इन बैठकों का हिस्सा बनने के लिए विभागीय मंत्री से लेकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों को दिल्ली से मुंबई की दौड़ लगाने की मजबूरी बनी रहती है।
कमेटियों की दोहरी भागदौड़
मंत्री और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग स्तर के कामों के लिए देश भर की कमेटियों के पदाधिकारियों और अधिकारियों को कभी दिल्ली दौड़ लगाना पड़ती है। कभी हज कमेटी मुख्यालय से संबंधित कामों के लिए मुंबई भागना पड़ता है। एक ही स्थान पर सभी लोगों के मौजूद न होने से कई कामों को देरी भी होती है और कई काम प्रभावित होते हैं।