मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए सरकार अब तमिलनाडु और केरल की स्वास्थ्य व्यवस्था से सीख लेकर नई कार्ययोजना तैयार कर रही है। चार सदस्यीय दल ने दोनों राज्यों का दौरा कर गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद महिलाओं और नवजात की देखभाल की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया है। इसी अनुभव के आधार पर मध्यप्रदेश में आयुष जननी किट शुरू करने की तैयारी है। आयुष विभाग के दल में शामिल डॉ. नयन राम के अनुसार, दक्षिण के राज्यों में लगभग सभी प्रसव संस्थागत यानी अस्पतालों में हो रहे हैं। इससे गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं की पहचान और तत्काल उपचार में मदद मिलती है। मध्यप्रदेश में अभी शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव का लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है।
गर्भधारण से पहले ही स्वास्थ्य पर फोकस
प्रस्तावित आयुष जननी किट की खासियत यह होगी कि इसका फोकस केवल गर्भवती महिला तक सीमित नहीं रहेगा। भावी माता-पिता को गर्भधारण से पहले ही पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सहायता देने की योजना है। इसमें पोषण पूरक के साथ आयुष आधारित विकल्प शामिल किए जाएंगे। डॉ. नयन राम के मुताबिक, इसका उद्देश्य माता-पिता के पोषण, हीमोग्लोबिन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर करना है, ताकि गर्भधारण के बाद मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़े।
एनीमिया और गर्भावस्था की सामान्य दिक्कतों पर भी जोर
किट में आंवला, दाड़िम, इलायची, यष्टिमधु और शुंठी जैसी आयुष औषधियों को शामिल करने की योजना बताई गई है। विभाग का कहना है कि इनके उपयोग से पोषण, पाचन और गर्भावस्था के दौरान होने वाली मतली जैसी सामान्य समस्याओं में मदद मिल सकती है। हालांकि इनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार ही किया जाएगा।
कम वजन के नवजात पर भी नजर
डॉ. नयन राम ने बताया कि ढाई किलो से कम वजन के बच्चों में जन्म के बाद विशेष नवजात देखभाल की जरूरत बढ़ सकती है। ऐसे बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने की स्थिति बनती है और मां के साथ उनके शुरुआती स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था में गर्भावस्था से पहले ही मां के पोषण और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की बात कही गई है।
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एमपी का मातृ मृत्यु अनुपात 135
मध्यप्रदेश का मातृ मृत्यु अनुपात 2022-24 में 135 प्रति एक लाख जीवित जन्म दर्ज किया गया है। देश का आंकड़ा 87 है। हालांकि प्रदेश में लगातार सुधार हुआ है। 2019-21 में यह 175, 2020-22 में 159, 2021-23 में 142 और 2022-24 में घटकर 135 हुआ। शिशु मृत्यु दर के मामले में भी मध्यप्रदेश की स्थिति सुधार की मांग करती है। SRS के 2023 आंकड़ों में प्रदेश की शिशु मृत्यु दर 37 प्रति एक हजार जीवित जन्म दर्ज थी। आधिकारिक SRS रिपोर्ट में शिशु मृत्यु दर को जन्म के बाद एक वर्ष की उम्र से पहले होने वाली मृत्यु के आधार पर दर्ज किया जाता है।
आयुष को एनएचएम के नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी
सरकार की योजना आयुष जननी किट को केवल आयुष अस्पतालों तक सीमित रखने की नहीं है। इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नेटवर्क के साथ जोड़कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और आंगनवाड़ी स्तर तक पहुंचाने की तैयारी है। डॉ. नयन राम के अनुसार, मंत्री के निर्देश के बाद एनएचएम के साथ मिलकर किट को अंतिम रूप दिया जाएगा। लक्ष्य है कि इसे आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा संस्थानों के साथ-साथ मैदानी स्वास्थ्य तंत्र से जोड़ा जाए।
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छह महीने से एक साल में शुरू करने का लक्ष्य
विभागीय स्तर पर इसे अगले छह महीने से एक साल के भीतर शुरू करने की तैयारी है। पहले कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश में लागू करने की योजना है। दक्षिण के राज्यों में संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु देखभाल की व्यवस्थाओं के अध्ययन के साथ मध्यप्रदेश का फोकस अब गर्भावस्था शुरू होने के बाद उपचार करने के बजाय गर्भधारण से पहले ही माता-पिता के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देने पर है।