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दिग्विजय सिंह की पदयात्रा: दो शंकराचार्यों का मिला समर्थन, धर्म के नाम पर अधर्म के खिलाफ जनजागरण का संकल्प

Fri, 16 Oct 2026 06:20 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने शुभकामना संदेश भेजे हैं। दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन में महाकालेश्वर के दर्शन के साथ शुरू होगी और अयोध्या तक जाएगी।
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पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के शुभकामना संदेश मिले हैं। दोनों संतों ने अपने संदेशों में धर्म, नीति, सनातन परंपराओं और देवस्थानों की मर्यादा से जुड़े विचार रखे हैं। दिग्विजय सिंह ने इन संदेशों को साझा करते हुए कहा कि शंकराचार्यों के आशीर्वचन उनके संकल्प और यात्रा में शामिल होने वाले सहयात्रियों के लिए प्रेरणादायी हैं। दिग्विजय सिंह की यह यात्रा 20 अक्टूबर से उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लेकर शुरू करने की प्रस्तावित है। यात्रा के जरिए धर्म के नाम पर कथित अधर्म, धार्मिक स्थलों की मर्यादा और सनातन धर्म के मूल स्वरूप को लेकर जनजागरण करने की बात कही गई है।
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अविमुक्तेश्वरानंद बोले- धर्म के आवरण में अधर्म हो तो सत्य के पक्ष में खड़े हों
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने शुभकामना संदेश में धर्म और अधर्म के बीच अंतर को रेखांकित किया है। उन्होंने दिग्विजय सिंह की उस पहल का उल्लेख किया, जिसके तहत भगवान श्रीराम की प्रेरणा से धर्म के नाम पर हो रहे कथित अधर्म और मंदिरों में चढ़ावे की चोरी के खिलाफ जनजागरण का संकल्प लिया गया है। उन्होंने 20 अक्टूबर से दशहरा पर्व के अवसर पर भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लेकर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करने के संकल्प के लिए शुभकामनाएं दीं। उनके संदेश में कहा गया कि सनातन धर्म का आधार सत्य, अहिंसा, पवित्रता, नीति और देवालयों की मर्यादा है। धर्म के नाम पर अनाचार, असत्य या छद्म आचरण को सनातन परंपरा का वास्तविक स्वरूप नहीं माना जा सकता। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने देवस्थानों की मर्यादा बनाए रखने और श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित सामग्री के सम्मान का मुद्दा भी उठाया। उनके संदेश के अनुसार, धार्मिक स्थलों की पवित्रता और परंपराओं की रक्षा के लिए आवाज उठाना धर्म के प्रति स्वाभिमान का विषय है।

सदानंद सरस्वती ने धर्म और नीति के संबंध पर रखे विचार
द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भी दिग्विजय सिंह की यात्रा के लिए शुभकामना संदेश भेजा है। उन्होंने अपने संदेश में भारत की धार्मिक और नैतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति का उपयोग धर्म को बल देने के लिए किया जाना चाहिए।संदेश में सनातन धर्म की व्यापकता और उसके मूल सिद्धांतों पर विचार रखे गए हैं। स्वामी सदानंद सरस्वती ने दिग्विजय सिंह की यात्रा को भगवान महाकाल के श्रीचरणों में समर्पित बताते हुए उनके लिए आध्यात्मिक शक्ति की प्रार्थना की। दिग्विजय सिंह ने दोनों शंकराचार्यों के संदेशों के लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा कि संतों के विचार समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं और उनके आशीर्वचन यात्रा के संकल्प को नई दिशा और शक्ति देंगे।
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उज्जैन से अयोध्या तक यात्रा निकालने की तैयारी
दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ की शुरुआत 20 अक्टूबर को उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर के दर्शन और आशीर्वाद के साथ होनी है। यात्रा के माध्यम से धार्मिक स्थलों की पवित्रता, मंदिरों में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे और सनातन धर्म की मर्यादा को लेकर लोगों के बीच संवाद करने की योजना है।दो शंकराचार्यों के शुभकामना संदेश मिलने के बाद दिग्विजय सिंह ने इसे अपने अभियान के लिए महत्वपूर्ण बताया है। यात्रा के जरिए उठाए जाने वाले मुद्दों और धार्मिक परंपराओं को लेकर उनके संकल्प पर अब राजनीतिक और धार्मिक, दोनों ही दृष्टियों से नजर रहेगी।


 
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