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Cough Syrup:: छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में डॉक्टर की गिरफ्तारी का विरोध, कहा-डॉक्टर उपचार करता है,दवा नहीं बनाता

Fri, 10 Oct 2025 07:14 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत के मामले में डॉ. प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी के खिलाफ भोपाल में शुक्रवार को प्रदेशभर के चिकित्सकों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया।और कहा कि डॉक्टर को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि दवाओं की गुणवत्ता और उत्पादन की जिम्मेदारी एफडीए की है।
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चिकित्सकों की प्रेस वार्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छिंदवाड़ा में मिलावटी कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत के मामले में डॉ. प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी के खिलाफ भोपाल में शुक्रवार को प्रदेशभर के चिकित्सकों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बड़े चिकित्सा संगठनों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और कहा कि डॉक्टर को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि दवाओं की गुणवत्ता और उत्पादन की जिम्मेदारी एफडीए (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) की है। प्रेस वार्ता की शुरुआत में सभी चिकित्सकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने छिंदवाड़ा में दिवंगत हुए 23 मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित की और इस दर्दनाक घटना पर गहरा शोक जताया।
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डॉक्टर की गिरफ्तारी को बताया असंवैधानिक
चिकित्सा महासंघ, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, यूनाइटेड डॉक्टर्स फेडरेशन, नर्सिंग होम एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने डॉ. प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट की जैकब मैथ्यू केस में दी गई गाइडलाइंस का उल्लंघन बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. राकेश मालवीया, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. रितेश तंवर, डॉ. राजेश टिक्कस सहित कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने कहा कि डॉक्टर का कार्य केवल इलाज करना होता है, न कि दवा बनाना या उसकी गुणवत्ता जांचना। ऐसे में डॉक्टर को दोषी ठहराना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और मनोबल गिराने वाला है।

कोल्डरिफ सिरप में 500 गुना जहरीली मिलावट
डॉक्टरों ने दावा किया कि तमिलनाडु सरकार की लैब रिपोर्ट में कोल्डरिफ कफ सिरप में डायइथिलीन ग्लाइकोल (एक इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट) की 48.5% मात्रा पाई गई, जो निर्धारित सीमा (1%) से 500 गुना ज्यादा है। यह साल्वेंट सीधे तौर पर किडनी फेलियर और ट्युबुलर नेक्रोसिस का कारण बनता है, जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सामने आया है।
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एफडीए पर लापरवाही के आरोप
डॉ. अशोक ठाकुर ने बताया कि भारत सरकार की 18 दिसंबर 2023 की एडवाइजरी के बावजूद मप्र. के एफडीए विभाग ने फिक्स्ड ड्रग कॉम्बिनेशन सिरप पर आवश्यक चेतावनी और नियंत्रण लागू नहीं किया। विभाग द्वारा 01 अक्टूबर 2025 को पहली बार कार्रवाई की गई, तब तक ये दवाएं प्रदेशभर में खुलेआम बिकती रहीं।

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डॉक्टर को बलि का बकरा बना दिया गया
डॉ. राजेश टिक्कस ने स्पष्ट किया कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों में इस सिरप से कोई मौत पूर्व में रिपोर्ट नहीं हुई है। छिंदवाड़ा की मौतें कफ सिरप में ज़हरीले सॉल्वेंट की मिलावट के कारण हुई हैं, न कि डॉक्टर द्वारा दवा लिखने के कारण।
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डॉक्टरों की मांगें
1. डॉ. प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी अवैध है, उन्हें अविलंब रिहा किया जाए।
2. एफडीए म.प्र. के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
3. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार चिकित्सकीय मामलों में गिरफ्तारी से पहले तकनीकी अभिमत (medical opinion) अनिवार्य हो।



प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे ये प्रमुख चेहरे
प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर एसोसिएशन, मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन,इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ,यूनाइटेड डॉक्टर फेडरेशन,जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन से डॉ. राकेश मालवीया, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. रितेश तंवर, डॉ. राजेश टिक्कस, डॉ. महेश माहेश्वरी, डॉ. लोकेंद्र दवे, डॉ. ललित श्रीवास्तव, डॉ. मजहर मालिक, डॉ. दिनेश मडावे, डॉ. आदित्य सक्सेना, डॉ. राहुल रोकड़े, डॉ. अनूप हजेला, डॉ. संजय गुप्ता और डॉ. उमेश शारदा।
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