छिंदवाड़ा में कथित जहरीली कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत पर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह बच्चों की मौत के सही आंकड़े छिपा रही है और पीड़ित परिवारों को राहत देने के बजाय मामले को टालने की कोशिश कर रही है।
20 से अधिक बच्चों की मौत
सिंघार ने कहा कि अब तक 20 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है और कई बच्चे अभी भी वेंटिलेटर पर हैं। उन्होंने सवाल किया कि “अगर किसी मंत्री के बच्चे को कुछ होता, तो सरकार उसे एयरलिफ्ट कर देश के बड़े अस्पताल में भेज चुकी होती। लेकिन गरीबों के बच्चों के लिए सरकार के पास इलाज के पैसे नहीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के "यह पुरानी बात हो गई है" वाले बयान पर सिंघार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन बताया।
25 साल में नहीं सुधरी स्वास्थ्य व्यवस्था
सिंघार ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा चुकी हैं, ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर और उपकरणों की भारी कमी है। बच्चों को पोषण नहीं मिल रहा और योजनाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं। उन्होंने कहा कि बाल अपराध, कुपोषण और चिकित्सा लापरवाही में प्रदेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
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कंपनी पर एफआईआर कब?
उमंग सिंघार ने पूछा कि घटना के लिए जिम्मेदार दवा कंपनी के खिलाफ एफआईआर कब होगी? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री ने जिस कफ सिरप को पहले क्लीन चिट दी थी, अब वही घटनास्थल पर दौरे कर रहे हैं।
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क्या 25 हजार बच्चों की ट्रेसिंग की जाएगी?
सिंघार ने सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या छिंदवाड़ा के परासिया ब्लॉक के 25 हजार बच्चों की ट्रेसिंग की जाएगी? साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी मांगी कि तमिलनाडु की जिस कंपनी से यह दवा आई थी, उसकी सप्लाई किन-किन जिलों में हुई।