मध्यप्रदेश में पत्थरबाजों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है। इस कानून के तहत सरकारी संपत्ति के साथ प्रदर्शनकारी, दंगाई या पत्थरबाज यदि किसी निजी व्यक्ति के घर, दुकान, गाड़ी या अन्य किसी वस्तु को भी नुकसान पहुंचाते हैं तो इसकी भरपाई उन्हीं से होगी।
ऐसा नहीं करने वाले लोगों के खिलाफ राज्य सरकार खुद अदालत में लड़ाई लड़कर पीड़ित व्यक्ति को क्षतिपूर्ति दिलवाएगी। इसके साथ ही दंगाइयों और प्रदर्शनकारियों को भड़काने वाले या किसी उग्र आंदोलन को हवा देने वालों से भी नुकसान की वसूली की जाएगी। गृह विभाग ने पत्थरबाजों के खिलाफ कानून का प्रारंभिक ड्राफ्ट शुक्रवार को तैयार कर लिया। अगले सप्ताह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसे अंतिम रूप दे सकते हैं। इसके बाद ड्राफ्ट मंजूरी के लिए कैबिनेट में जाएगा।
नया कानून क्यों... पुराने में न पत्थरबाजी का जिक्र, न जवाबदेही
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने विधि विभाग के प्रमुख सचिव और आईजी सीआईडी के साथ शुक्रवार को बैठक की। इस दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में बने पत्थरबाजी कानून का परीक्षण किया गया। जम्मू-कश्मीर के एक्ट पर भी बात हुई, लेकिन वह मप्र के हिसाब से कारगर नहीं था, इसलिए उत्तर प्रदेश के कानून के प्रमुख प्रावधान लेकर मध्यप्रदेश अपना एक्ट बनाया है।
अभी एक अधिनियम प्रीवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी 1984 है, जिसमें पांच साल की सजा का प्रावधान है। इसके साथ भारतीय दंड संहिता में भी बलवी, दंगा आदि के बारे में जिक्र है, लेकिन पत्थरबाजी का उल्लेख नहीं है। साथ ही सिविल लाइबिलिटी और रिकवरी भी तय नहीं है।
हर जिले में क्लेम ट्रिब्यूनल बनेगा...
पीड़ित व्यक्तियों को नुकसान की भरपाई के लिए हर जिले में दावा अधिकरण बनेगा। इसमें एडिशनल कलेक्टर रैंक का अधिकारी होगा। उसे दावा निर्धारण करने का अधिकार होगा। इसे बाद में कोर्ट में चैलेंज भी किया जा सकेगा।
हड़ताल, दंगा, बंद, हिंसात्मक प्रदर्शन और पत्थर बाजी करने वाले एक्ट के दायरे में आएंगे।सरकारी के साथ निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को सजा होगी। क्षति पहुंचाई गई संपत्ति और वस्तु की भरपाई आरोपियों से ही वसूली के जरिए की जाएगी। नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति ने राशि नहीं दी तो उसकी संपत्ति की नीलामी से पैसा लिया जाएगा।
असेसर की नियुक्त होगी जो इन मामलों में जज या मजिस्ट्रेट को सलाह देने के साथ आरोपी द्वारा किए गए नुकसान का आकलन भी करेगा।यदि प्रदर्शनकारी एक से अधिक हैं तो क्षतिपूर्ति का पैसा चुकाने की जिम्मेदारी समान रूप से सभी पर आएगी। पैसा देने में देरी की गई तो ब्याज भी अधिरोपित होगा।ऐसे मामलों की सुनवाई सिविल कोर्ट में नहीं, क्रिमिनल कोर्ट में होगी।