आम चुनाव में कालेधन के लेन-देने के मामले में केंद्रीय प्रत्यक्षकर बोर्ड (सीबीडीटी) में शामिल तीन आईपीएस अधिकारी और एक राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी से सरकार ने जवाब मांगा है। इन अधिकारियों से पूछा गया है कि सीबीडीटी की अप्रेजल रिपोर्ट में जिस राशि के लेन-देन के आगे उनका नाम लिखा है, उस पर उनका क्या कहना है। अधिकारियों का जवाब आने के बाद सरकार विभागीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है।
इन अधिकारियों में एडीजी स्तर के अधिकारी सुशोभन बैनर्जी, संजय व्ही माने और व्ही मधुकुमार हैं। जबकि राज्य पुलिस सेवा व एसपी स्तर के अधिकारी में अरुण मिश्रा का नाम है। वर्ष 1989 बैच के अधिकारी बैनर्जी वर्तमान में जेएनपीए सागर में एडीजी, 1989 बैच के अधिकारी वर्तमान में एडीजी पुलिस सुधार, 1991 बैच के अधिकारी व्ही मधुकुमार एडीजी पीएचक्यू और अरुण मिश्रा उप सेनानी 35वीं भा.र. वाहिनी विसबल मंडला में पदस्थ हैं। इन सभी पर सिविल सेवा आचरण नियम 14(3) के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है। पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इन अधिकारियों को जवाब देने के लिए एक माह का वक्त दिया गया है।
सीबीडीटी ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी अप्रेजल रिपोर्ट भेजी थी। इसके बाद जनवरी के पहले सप्ताह में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मध्यप्रदेश सरकार को अग्रिम कार्रवाई करने के लिए अप्रेजल रिपोर्ट भेज दी थी। करीब डेढ़ माह तक उच्च स्तरीय अधिकारियों ने इस पर विचार किया और छानबीन की इसके बाद अंतत: आरोप पत्र दायर किया गया है।
जल्द अपना पक्ष रखेंगे अधिकारी
पुलिस अधिकारियों के वकील पीयूष पाराशर ने कहा कि 25 फरवरी को आरोप-पत्र मिल गए हैं। इसको ठीक से पढ़ समझकर समय सीमा में इसका जवाब दिया जाएगा। सुशोभन बैनर्जी की तरफ से अभी आरोप-पत्र मिलने की जानकारी नहीं मिली है।
कारण बताओ नोटिस का प्रावधान नहीं : मिश्रा
मध्यप्रदेश के पूर्व उप महाधिवक्ता व वरिष्ठ वकील अजय मिश्रा का कहना है कि यदि आदर्श व्यवस्था की बात करें, तो आरोप-पत्र देने से पहले कारण बताओ नोटिस देना चाहिए। इसमें कोई बुराई नहीं, लेकिन सिविल सेवा आचरण नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सरकार आरोपों से जुड़े किसी भी मामले में अफसर को सीधे आरोप-पत्र जारी कर सकती है। इसके बाद भी संबंधित व्यक्ति का जवाब आता है। जवाब यदि संतुष्ट करने वाला है, तो आगे की कार्रवाई नहीं की जाती है। अगर जवाब संतुष्ट करने वाला नहीं है, तो कार्रवाई प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।